हम्मीरदेव वाक्य
उच्चारण: [ hemmiredev ]
उदाहरण वाक्य
- काव्य का स्वरूप देने के लिए कवि ने कुछ घटनाओं की कल्पना भी की है जैसे महिमा मंगोल का अपनी प्रेयसी वेश्या के साथ दिल्ली से भागकर हम्मीरदेव की शरण में आना और अलाउद्दीन का दोनों को माँगना।
- इन्होंने नीवँगढ़ (वर्तमान नीमराणा अलवर) के राजा चंद्रभान चौहान के अनुरोध से 'हम्मीररासो' नामक एक बड़ा प्रबंधकाव्य संवत् 1875 में लिखा जिसमें रणथंभौर के प्रसिद्ध वीर महाराज हम्मीरदेव का चरित्र वीरगाथाकाल की छप्पय पद्ध ति पर वर्णन किया गया है।
- कई ऐतिहासिक घटनाओं व हम्मीरदेव चौहान के हठ और शौर्य के प्रतीक इस दुर्ग का जीर्णोद्दार जयपुर के राजा प्रथ्वी सिंह और सवाई जगत सिंह ने कराया और महाराजा मान सिंह ने इस दुर्ग को शिकारगाह के रुप मे परिवर्तित कराया
- इन्होंने नीवँगढ़, वर्तमान नीमराणा, अलवर के राजा 'चंद्रभान चौहान' के अनुरोध से 'हम्मीर रासो' नामक एक बड़ा प्रबंध काव्य संवत् 1875 में लिखा जिसमें रणथंभौर के प्रसिद्ध वीर महाराज हम्मीरदेव का चरित्र वीरगाथा काल की छप्पय पद्धति पर वर्णन किया गया है।
- एक और हम्मीरदेव चौहान ने अपने शरणागत की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व लुटाकर भी क्षात्र धर्म के शरणागत की रक्षा करने के नियम का पालन किया वहीँ मुहम्मदशाह ने अपने शरणदाता के लिए अपना कुछ दांव पर लगाकर वीरगति प्राप्त की |
- इन्होंने नीवँगढ़ (वर्तमान नीमराणा अलवर) के राजा चंद्रभान चौहान के अनुरोध से ' हम्मीररासो ' नामक एक बड़ा प्रबंधकाव्य संवत् 1875 में लिखा जिसमें रणथंभौर के प्रसिद्ध वीर महाराज हम्मीरदेव का चरित्र वीरगाथाकाल की छप्पय पद्ध ति पर वर्णन किया गया है।
- इनकी परंपरा इस प्रकार है-कर्त्तृराज, महिराज, मूर्धराज, उदयराज, गरुड़सेन, समरसेन, आनंदसेन, करनसेन, कुमारसेन, मोहनसेन, राजसेन, काशीराज, श्यामदेव, प्रह्मलाददेव, हम्मीरदेव, आसकरन, अभयकरन, जैतकरन, सोहनपाल और करनपाल।
- कई ऐतिहासिक घटनाओं व हम्मीरदेव चौहान के हठ और शौर्य के प्रतीक इस दुर्ग का जीर्णोद्दार जयपुर के राजा प्रथ्वी सिंह और सवाई जगत सिंह ने कराया और महाराजा मान सिंह ने इस दुर्ग को शिकारगाह के रुप मे परिवर्तित कराया | आजादी के बाद यह दुर्ग सरकार के अधीन हो गया जो 1964 के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के नियंत्रण मे है |
- गोविन्द राज के अलावा वाल्हण देव, प्रहलादन, वीरनारायण, वाग्भट्ट, नाहर देव, जैमेत्र सिंह, हम्मीरदेव, महाराणा कुम्भा, राणा सांगा, शेरशाह सुरी, अल्लाऊदीन खिलजी, राव सुरजन हाड़ा और मुगलों के अलावा आमेर के राजाओं आदि का समय-समय पर नियंत्रण रहा लेकिन इस दुर्ग की सबसे ज्यादा ख्याति हम्मीर देव (1282-1301) के शासन काल मे रही | हम्मीरदेव का 19 वर्षो का शासन इस दुर्ग का स्वर्णिम युग था।
- गोविन्द राज के अलावा वाल्हण देव, प्रहलादन, वीरनारायण, वाग्भट्ट, नाहर देव, जैमेत्र सिंह, हम्मीरदेव, महाराणा कुम्भा, राणा सांगा, शेरशाह सुरी, अल्लाऊदीन खिलजी, राव सुरजन हाड़ा और मुगलों के अलावा आमेर के राजाओं आदि का समय-समय पर नियंत्रण रहा लेकिन इस दुर्ग की सबसे ज्यादा ख्याति हम्मीर देव (1282-1301) के शासन काल मे रही | हम्मीरदेव का 19 वर्षो का शासन इस दुर्ग का स्वर्णिम युग था।