अंतराग्नि वाक्य
उच्चारण: [ anetraagani ]
उदाहरण वाक्य
- ' इस तरह के विचार अभिव्यक्त करके खुद अपने में अंतराग्नि रख ने वाले उसको दावानल में बदलने की सोच को कार्य रूप देना चाहते हैं लेकिन ये भूल जाते हैं कि दावानल चुन चुन कर उन्हीं लोगों को नहीं जलाएगी जिन्हें आप जलाना चाहते हैं-अग्नि बहुत निष्पक्ष होती है और वह सबको जलाकर राख कर देती है ।
- कहते हैं, मैं स्वयं विश्व में आया बिना पिता के: तो क्या तुम भी, उसी भांति, सचमुच उत्पन्न हुई थीं माता बिना, मात्र नारायण ऋषि की कामेच्छा से, तप:पूत नर के समस्त संचित तप की आभा-सी? या समुद्र जब अंतराग़्नि से आकुल, तप्त, विकल था, तुम प्रसून-सी स्वयं फूट निकलीं उस व्याकुलता से, ज्यॉ अम्बुधि की अंतराग्नि से अन्य रत्न बनते है?
- उषा-सदृश प्रकटी थीं किन जलदॉ का पटल हटाकर? कहते हैं, मैं स्वयं विश्व में आया बिना पिता के: तो क्या तुम भी, उसी भांति, सचमुच उत्पन्न हुई थीं माता बिना, मात्र नारायण ऋषि की कामेच्छा से, तप: पूत नर के समस्त संचित तप की आभा-सी? या समुद्र जब अंतराग़्नि से आकुल, तप्त, विकल था, तुम प्रसून-सी स्वयं फूट निकलीं उस व्याकुलता से, ज्यॉ अम्बुधि की अंतराग्नि से अन्य रत्न बनते है?
- हिन् दी व् यंग् य लेखन आयोजन यह दिल् ली में है इसमें आएंगे जो जन मन उनके महक जाएंगे व् यंग् य के तीखे फूल वहां पर खिलाए जाएंगे आप खाने मत लग जाना फूलों को मानवता के कवितायेँ आजकल “ वाद ” की ड्योढ़ी पर ठिठकी हैं ह्रदय-अम्बुधि अंतराग्नि से पयोधिक-सी छटपटाती * उछ्रंखल * प्रेममय रंगहीन पारदर्शी कवितायेँ जिन्हें लुभाता है सिर्फ एक रंग कृष्ण की बांसुरी का लहरों के मस्तक पर धर पग लुक छिप खेलती प्रबल वेग के...