अभिनव गुप्त वाक्य
उच्चारण: [ abhinev gaupet ]
उदाहरण वाक्य
- भरत के हाल ही में उपलब्ध नाट्यशास्त्र पर सर्वाधिक प्रमाणिक और विद्वत्तापूर्ण ' अभिनव भारती' टीका के कर्ता अभिनव गुप्त हैं।
- तंत्रालोक में आचार्य अभिनव गुप्त ने स्वस्तिक का अर्थ करते हुए लिखा है कि नादब्रह्म से अक्षर तथा वर्णमाला बनी, मातृका की उत्पत्ति हुई।
- 278 रस को आनंद स्वरूप मानने वाले तथा अभिव्यक्तिवाद के संस्थापक है-अभिनव गुप्त 279 भट्टनायक ने किस रस सिध्दांत की स्थापना की-भुक्तिवाद की।
- भरत मुनि की ‘ नाट्यशास्त्र ' की व्याख्या करते हुए अभिनव गुप्त ने लिखा है कि खलनायक की दुष्टता ही नायक का धीरोदत्त रूप चरितार्थ करती है।
- भरत ने अपने अनुभव के आधार पर नाट्यशास्त्र की रचना की और इसकी रचना के लगभग नौ सौ साल बाद अभिनव गुप्त आकर उसे पुनराविष्कृत करते हैं.
- मंजुबाला शुक्ला ने भरत मुनि, शारंगदेव, नन्दीकेश्वर, दत्तिल और अभिनव गुप्त आदि की पुस्तकों का हवाला देकर स्पष्ट किया कि पुस्तकों की भूमिका कभी भी कम नहीं होगी.
- इस बीच अनेक व्याख्याकार आये होंगे लेकिन इसके बाद भी दसवीं शताब्दी के अन्त में अभिनव गुप्त को यह आवश्यकता महसूस हुई कि वह एक बार फिर उसकी व्याख्या करें.
- वहां नरबलिकर्ताओं के नेता अभिनव गुप्त को अपनी करूणा से पराजित किया, वह उनका शिष्य भी बन गया, लेकिन ऐसा विष भोजन में मिलाया जिससे शंकराचार्य को भगंदर हो गया।
- (5) ध्वनि संप्रदाय का प्रवत्र्तन आनंदवर्धन (नवम शताब्दी का उत्तरार्ध) ने अपने युगांतरकारी ग्रंथ “ध्वन्यालोक” में किया तथा इसका प्रतिष्ठापन अभिनव गुप्त (10वीं शताब्दी) ने ध्वन्यालोक की लोचन टीका में किया।
- महामाहेश्वर आचार्य अभिनव गुप्त ने जगदाम्बिके को जब “ सकलशब्दमयी किल ते तनुः ” कहा था, तब वे कला / साहित्य में उनकी मूर्ति का शिल्पांकन ही कर रहे होंगे।