अरविंद अडिगा वाक्य
उच्चारण: [ arevined adigaaa ]
उदाहरण वाक्य
- ओल्ड क्लासिक्स को छोड़ दें तो भी फिर इस बात का जवाब नहीं होगा कि टैगोर, मुल्कराज व नारायण के साथ-साथ अरविंद अडिगा, विक्रम सेठ, झुंपा लहरी अच्छे अनुपात में अंग्रेजी में क्यूं बिकती हैं।
- द हिंदू ' के मुखपृष्ठ पर छपे इस समाचार पर गयी कि इस वर्ष का प्रतिष्ठित ‘ बूकर पुरस्कार ' तैंतीस-वर्षीय भारतीय अंग्रेजी लेखक अरविंद अडिगा को उनके प्रथम उपन्यास ‘ द ह्वाइट टाइगर ' पर दिया गया है ।
- अब जब चेतन भगत के सारे उपन्यासों पर बॉलीवुड फिल्म बना चुका है आशा की जानी चाहिए कि वो विक्रम सेठ, अमिताभ घोष और अरविंद अडिगा पर भी दृष्टि डालेगा और इसी बहाने किताबों की दुकानें भी गुलजार हो जाया करेंगी।
- लेकिन निर्णायकों ने उन्हें अंगुठा दिखा दिया जिन्होंने दो पहली बार उपन्यास लिखने वाले भारतीय पत्रकार अरविंद अडिगा [33] और आस्ट्रेलियाई पटकथा लेखक स्टीव टोल्ट्ज को उन छह लेखकों में चुना है जिनमें से किसी एक को 50 हजार पाउंड का पुरस्कार दिया जाएगा।
- सफेद बाघ का शिकार अरविंद अडिगा के बुकर पुरस्कार से सम्मानित उपन्यास द व्हाइट टाइगर पढ़ चुकने के तीन दिन बाद तक मेरे ज़हन में ये बात क्यों नहीं आई? भारत में अंग्रेज़ी और अन्य भाषाओं के टकराव की बहसें होनी तो प्रत्याशित थीं।
- किरण देसाई को उनके उपन्यास इनहेरिटेंस ऑफ लॉस के लिए अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त बुकर पुरस्कार मिला तो उधर अरविंद अडिगा ने भी अपने उपन्यास व्हाइट टाइगर के लिए दुनिया भर के लेखकों को पछाड़ कर बुकर की रेस जीती और अपने लेखन का डंका बजाया.
- मिडनाइट चिल्ड्रेन ' के लेखक सलमान रुश्दी, ‘ गॉड आॅफ स्माल थिंग्स ' की लेखिका अरुंधति रॉय, ‘ इंन्हेरिटेंस आॅफ लॉस ' की लेखिका किरण देसाई, ‘ द वाइट टाइगर ' के लेखक अरविंद अडिगा की नैतिकता पर कोई फर्क नहीं पड़ता है।
- ? यही वजह है कि भारत के सबसे बड़े साहित्यिक पुरस्कार ज्ञानपीठ से हिंदी कवि कुंवर नारायण को सम्मानित किए जाने को लेकर कोई उत्साह और उत्सव इस पढ़े-लिखे तबके में नहीं दिखलाई पड़ा जिसने कुछ दिन पहले ही एक नवतुरिया लेखक अरविंद अडिगा को मैन-बुकर दिए जाने का ज़ोरदार स्वागत किया था.
- इस लेख को पढने के बाद अपने अखबार के एक साथी जो की जामिया मिलिया से पढाई कर आया था चर्चा कर रहा था, तो उसने भी ये स्वीकार किया की इसमें से अरविंद अडिगा, हैरोल्ड पिंटर, प्रेस परिषद के अध्यक्ष जस्टिस जी एन रे और दक्षिण एशियाई पत्रकारों के संगठन साफमा के बारे में कुछ नहीं जनता.
- खान मार्केट चौराहे पर अरविंद अडिगा की व् हाइट टाइगर सहित अनेक अंग्रेजी किताबों के पाइरेटेड संस् करण बेचता किशोर, इंडिया गेट के आस पास चमचमाती और महंगी से महंगी गाडियों का झुंड, राजपथ पर मंडराती देशी विदेशी लड़कियां, अशोक रोड पर जामुन बेचती कुछ बच्चियां, राजेंद्रप्रसाद मार्ग-जनपथ चौराहे पर भिखारियों का एक टोला. और पाश की पंक्तियां..