असिक्नी वाक्य
उच्चारण: [ asikeni ]
उदाहरण वाक्य
- लाहुल स्पति, बल्कि हिमाचल में जाये बिना भी असिक्नी को पढ़ते हुए कल्पनाओं में वहाँ का चित्र सा उभरने लगता है, बावजूद इस तथ्य के असिक्नी रचनात्मक, वैचारिक और रचनाकारों की सहभागिता के स्तर पर पूरी तरह एक अखिल भारतीय पत्रिका है।
- इस अवसर पर ' लोकाकायत ' के सम्पादक बलराम, ' शिखर ' के सम्पादक केशव, ' असिक्नी ' के सम्पादक निरंजन देव शर्मा, हिमाचल के सुपरिचित कवि सुरेश सेन निशांत, आत्मा रंजन, ईशिता, प्रदीप सैनी, सहित दो दर्जन कवि मौजूद थे।
- गीत अतीत के संकलन कर्ता श्री सतीश लोप्पा ने शोध् छात्रों से आग्रह किया कि वे अपने शोध पत्रों के अंश चन्द्रताल, असिक्नी, कुंज़ोम आदि पत्रिकाओं में प्रकाशित करवाएं ताकि लाहुल स्पिति के लेखक व पाठक लाहुल स्पिति पर हो रहे लेटेस्ट शोध कार्यों से वाक़िफ हो सके.
- {अविराम के ब्लाग के इस स्तम्भ में अब तक हमने क्रमश: ' असिक्नी ', ' प्रेरणा (समकालीन लेखन के लिए) ', कथा संसार, संकेत, समकालीन अभिव्यक्ति, हम सब साथ साथ, आरोह अवरोह तथा लघुकथा अभिव्यक्ति साहित्यिक पत्रिकाओं का परिचय करवाया था।
- * असिक्नी * साहित्य एवम विचार की पत्रिका * है जो कि सुदूर हिमालय के सीमांत अहिन्दी प्रदेशों में हिन्दी भाषा तथा साहित्य को लोकप्रिय बनाने तथा इस क्षेत्र की आवाज़ को, यहाँ के सपनों और * संकटों * को शेष दुनिया तक पहुँचाने के उद्देश्य से रिंचेन ज़ङ्पो साहित्यिक-साँस्कृतिक सभा केलंग अनियतकलीन प्रकाशित करवाती है.
- ' शिखर ' के सम्पादक केशव नारायण ने प्रश्न उठाया कि इतना महत्वपूर्ण कार्य करने वाली पत्रिकाओं के साथ ' लघु ' शब्द क्यों जुड़ गया? उन्हों ने असिक्नी, सर्जक, सेतु, इरावती, शिखर, पर्वत राग, हिमाचल मित्र आदि पत्रिकाओं के हिमाचल की रचनाधर्मिता को मुख्यधारा तक ले जाने के प्रयास को रेखांकित किया.
- ज़िन्दा हथेलियाँ होती थीं ज़िन्दा ही त्वचाएं फिर पता नहीं क्या हुआ था अचानक हमने अपना वह स्पर्श खो दिया और फिर धीरे धीरे दृष्टि भी! बिल्कुल याद नहीं पड़ता क्या हुआ था? केलंग,27.08.2010 हिमाचल प्रदेश से प्रकाशित होने वाली साहित्यिक पत्रिका 'असिक्नी' आपकी नज़र तकरीबन तीन साल की लम्बी प्रतीक्षा के बाद असिक्नी का दूसरा अंक प्रकाशित हो गया है.
- वास्तव में अआप आप ही हैं आप ने जो असिक्नी पत्रिका को इंटरनेट पर सबके लिए उपलबध करवा दिया है उसके लिए आपका आभार बिलासपुर के सभी लेखकों की ओर से आप मं जो क्रियेटिवनैस है वह किसी और में नहीं है यह हम भी जनते हैं और सारी दुनिया को भी पता है लगे रहो मिंया इसी तरह से लगे रहो अरुण डोगरा रीतू बिलासपुर
- वास्तव में अआप आप ही हैं आप ने जो असिक्नी पत्रिका को इंटरनेट पर सबके लिए उपलबध करवा दिया है उसके लिए आपका आभार बिलासपुर के सभी लेखकों की ओर से आप मं जो क्रियेटिवनैस है वह किसी और में नहीं है यह हम भी जनते हैं और सारी दुनिया को भी पता है लगे रहो मिंया इसी तरह से लगे रहो अरुण डोगरा रीतू बिलासपुर
- दक्ष प्रजापति ने पंचजनी स्त्री से १ ० हजार पुत्र उत्पन्न किये, हर्यश्व आदि और असिक्नी से १ ०००, सबलाश्व आदि पुत्र उत्पन्न किये परन्तु ये सब हर्यश्व और सबलाश्व आदि देवर्षि नारद जी की प्रेरणा से पश्चिम समुद्र के तट पर, नारायण सर पर तपस्या करने के लिए गए और निवृति मार्ग को अपनाया अर्थात उन्होंने अपने पिता ब्रह्मा की आज्ञा न मानकर विवाह करना और सन्तान उत्पन्न करना स्वीकार नहीं किया।