आदिग्रंथ वाक्य
उच्चारण: [ aadigarenth ]
उदाहरण वाक्य
- गुणाढ्य की वृहत्कथा भारतीय कथा और लघुकथाओं का का आदिग्रंथ है, जो अपनी विशालता, रोचकता और संप्रेषणीयता में आज भी विश्व का प्राचीनतम और महत्तम ग्रंथ है।
- उन्होंने वही किया जो आदिग्रंथ के संकलनकर्ता और हरिमंदिर (आज का स्वर्णमंदिर) के निर्माता गुरु अरजन देखकर प्रसन्न होते, जिसकी नींव लाहौर के सूफी संत हजरत मियां मीर ने रखी थी।
- पीछे से चला आ रहा भाषाई इतिहास-बोध कहता था कि हिन्दी संस्कृत से निकली है, वेद संस्कृत में हैं और वेद चूंकि हिन्दुओं का आदिग्रंथ है इसलिए हिन्दी हिन्दुओं की भाषा है।
- संत त्रिलोचन संत नामदेव के समकालीन थे क्योंकि ' ' आदिग्रंथ '' में दो ऐसे श्लोक (दोहे) संग्रहीत है जो प्रश्नोत्तर के रूप में है जिनमें त्रिलोचन प्रश्नकर्ता है और संत नामदेव प्रश्नों का उत्तर दे रहे है।
- ऋगवेद को सबसे पुराना आदिग्रंथ माना जाता है, इसमें स्त्री की जगह पत्नि तथा ग्रहणी के रूप में ही है, यहाँ तक कि सभी देव देवता भी पुरुष ही हैं और देवियों के नाम बहुत कम जगह पर आते हैं.
- ऋगवेद को सबसे पुराना आदिग्रंथ माना जाता है, इसमें स्त्री की जगह पत्नि तथा ग्रहणी के रूप में ही है, यहाँ तक कि सभी देव देवता भी पुरुष ही हैं और देवियों के नाम बहुत कम जगह पर आते हैं.
- जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर तुलसी राम दलित विरोधी हिंसा के सन्दर्भ में इस बात को अक्सर चर्चा में लाते हैं कि हिन्दुओं के आदिग्रंथ कहे गये मनुस्मृति में जिस तरह शूद्रों-अतिशूद्रों-स्त्रिायों के खिलाफ हिंसा को एक ‘ पवित्राता ' प्रदान की गयी है, उसी का प्रतिबिम्बन आज भी दिखता है।
- सिक्ख · सिक्ख धर्म · गुरु गोविंद सिंह · गुरु हरगोविंद सिंह · गुरु अंगद देव · गुरु हरराय · गुरुमुखी लिपि · तेगबहादुर सिंह गुरु · बन्दा बहादुर · खड्ग शस्त्र · मणिसिंह · आदिग्रंथ · अकाली · निर्मल संप्रदाय · नामधारी सिक्ख संप्रदाय · खालसा पंथ · खालसा संगत · खालसा · गुरु अमरदास · गुरु रामदास · गुरु अर्जुन देव
- हालाँकि हमारे वैदिक आदिग्रंथ व ऐतिहासिक ज्ञान भाषागत व प्रतीकात्मक हैं, जिसके कारण उनमें वस्तुनिष्ठता व तार्कितता का अभाव है और यही कारण है कि हमारे सभी परंपरागत ज्ञानसंग्रह वर्तमान वैज्ञानिक ज्ञानधारा से विसंगत व विपरीत प्रतीत होते हैं, किंतु यदि गहराई से इन्हें समझने का प्रयाश करें तो यह स्पष्ट होता है कि हमारे ये ज्ञानधरोहर, विशेषतौर पर हमारा वैदिक ज्ञान, अद्भुत व बड़े ही स्पष्ट रूप से इस सम्पूर्ण ब्रह्मांड की पूर्णतामयी व्याख्या करने व इसके गूढ़ रहस्य को समझाने में सर्व-सक्षम है।
- पवित्र आदिग्रंथ वेद मानवता के ज्ञान का भंडार है जिसमे मनुष्य के बिभिन्न प्रकार से जीवन जीने प्रशासन स्राज्य भोगने यज्ञ, तथा विश्व का प्रथम धर्म ग्रन्थ का गौरव प्राप्त है दुर्भाग्य है की हमारे समाज के लोग महीधर, शयन और मैक्समुलर इत्यादि का भाष्य पढ़ रहे है जो प्रमाणिक नहीं है वेदों में गाय की पूजा और पालन के बारे में तो लिखा है और ये अनर्थ लगाने वाली या अल्प ज्ञान का परिणाम है हम सलाह देते है सभी को महर्षि दयानंद का भाष्य पढना चाहिए सभी का समाधान है.