आश्विन शुक्ल दशमी वाक्य
उच्चारण: [ aashevin shukel deshemi ]
उदाहरण वाक्य
- आश्विन शुक्ल दशमी-दशहरा माघ शुक्ल पंचमी-बसंत पंचमी वैशाख शुक्ल तृतीया-अक्षय तृतीया कार्तिक शुक्ल एकादशी-प्रबोधनी एकादशी (देव उठावनी एकादशी) फाल्गुन शुक्ल द्वितीया-फलेरा दोज आषाढ़ शुक्ल नवमी-भड्डली नवमी मुहूर्त चयन में शुभ तिथियां प्राप्त हो जाने के बाद लग्न शुद्धि अवश्य कर लेनी चाहिए।
- जिस तरह चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर नीम, ज्येष्ठ पूर्णिमा वट सावित्री व्रत पर वट वृक्ष, सोमवती अमावस्या पर तुलसी, पीपल का, भाद्र मास की कुश ग्रहिणी अमावस्या पर कुशा का और कार्तिक की आंवला नवमी पर आंवले के वृक्ष के पूजन का महत्व है, उसी प्रकार आश्विन शुक्ल दशमी (विजयदशमी) पर दो विशेष प्रकार की वनस्पतियों के पूजन का महत्व है।
- जिस तरह चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर नीम, ज्येष्ठ पूर्णिमा वट सावित्री व्रत पर वट वृक्ष, सोमवती अमावस्या पर तुलसी, पीपल का, भाद्रमास की कुशग्रहिणी अमावस्या पर कुशा का और कार्तिक की आँवला नवमी पर आँवले के वृक्ष के पूजन का महत्व है, उसी प्रकार आश्विन शुक्ल दशमी (विजयदशमी) पर दो विशेष प्रकार की वनस्पतियों के पूजन का महत्व है।
- {{Menu}} ' ' ' विजय दशमी / दशहरा / Vijay Dashmi / Dashahra / Dasara / Dussera '' ' br / > [[चित्र: Ramlila-Mathura-6. jpg | thumb | 250 px | दशहरा, [[रामलीला]] मैदान, [[मथुरा]] br / > Dussera, Ramlila Ground, Mathura]] आश्विन शुक्ल दशमी को विजयदशमी का त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।
- वर्ष प्रतिपदा (चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा या गुड़ी पड़वा), अक्षय तृतिया (वैशाख शुक्ल तृतिया) व विजयादशमी (आश्विन शुक्ल दशमी या दशहरा) ये पूरे तीन मुहूर्त तथा कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा (बलि प्रतिपदा) का आधा-इस प्रकार साढ़े तीन मुहूर्त स्वयं सिद्ध हैं (अर्थात् इन दिनों में कोई भी शुभ कर्म करने के लिए पंचांग-शुद्धि या शुभ मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं रहती) ।