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इसलाह वाक्य

उच्चारण: [ iselaah ]

उदाहरण वाक्य

  1. तुम अपने घर के गोशों (कोनों) में छिप कर बैठ जाओ, आपस के झगड़ों की इसलाह (सुधार) करने वाला सिर्फ़ अपने पर्वरदिगार की हमद करे और भला बुरा कहने वाला अपने ही नफ़्स की मलामत (निन्दा) करे ।
  2. ऐसा क्यों हुआ, इसलिये कि बीमारी कुछ और थी दवा कुछ और, अल्लाह ने तमाम कामों की बागडोर उनके ज़ाहिरी असबाब पर छोड़ रखी है, क्या इस उम्मत की इसलाह उस चीज़ के अलावा किसी और चीज़ से भी हो सकती है कि जिससे इब्तेदा में हुई थी?
  3. लगा था क़ायनात की सारी रोशनी उनके नज़्म-पाठ से झर रही है. इसी नज़्म एक पंक्ति 'तेरी आँखों के सिवा दुनिया मे रखा क्या है ' पर मजरूह साहब ने एक चित्रपट गीत लिखने की इजाज़त चाही थी.फ़ैज़ साहब ने दी और कहा शर्त ये है कि मजरूह तुम अपने गीत की इसलाह मुझसे करवाना..
  4. आज के दौर में जब लोग ये बताना ही शर्म की बात समझते हैं कि हमने इसलाह करवाई है उस दौर में नीरज जी इसलाह के बारे में डंके की चोट पर अपने ब् लाग में जिस तरह से जिक्र कर देते हैं वैसी मिसाल मिलना आज तो कम से कम मुश्किल है ।
  5. आज के दौर में जब लोग ये बताना ही शर्म की बात समझते हैं कि हमने इसलाह करवाई है उस दौर में नीरज जी इसलाह के बारे में डंके की चोट पर अपने ब् लाग में जिस तरह से जिक्र कर देते हैं वैसी मिसाल मिलना आज तो कम से कम मुश्किल है ।
  6. दुनिया के हुक्काम व सलातीन उन की इसलाह करते है जो उन के पैदा किये हुऐ नही होते, इन का काम तख़लीक़े फर्द या तरबियते फर्द नही होता, इन की ज़िम्मेदारी तनज़ीमे मम्लेकत और इस्लाहे फर्द होती है और ज़ाहिर है के तन्ज़ीम के उसूल और होंगे और तरबियत व तख़लीक़ के उसूल और इस्लाहे ज़ाहिर के तरीक़े और होंगे और तज़किये नफ्स के क़वानीन और
  7. के तहत दोस्ती का दायरा निहायत महदूद दो जायगा और हर शख़्स अपने से ज़्यादा बेहतर व बरतर सिफ़ात व आदात के हामिल आफ़राद की दोस्ती के हुसूल के चक्कर मे पड़ा रहेगा जबकि अगर ये कहा जाये कि फ़लाँ फ़लाँ सिफ़ात के हामिल अफ़राद से दोस्ती नुक़्सान देह है तो इसके नतीजे में जहाँ दोस्ती का दायरा वसी होगा वहाँ मनफ़ी सिफ़ात के हामिल अफ़राद की इसलाह का पहलू भी निकल आयेगा।
  8. अगर उन असहाब में से जो कि वेदों को अभी तक ख़ुदा का कलाम मान रहे हैं कोई शख़्स दलाईल व वाक़िआत की बिना पर इस बात को साबित कर दे और मुझे क़ायल कर दे कि वेदों को ख़ुदा का कलाम न मानना मेरी ग़लती है तो मैं फ़ौरन् अपनी ग़लती की इसलाह कर लूँगा मेरी ये पोज़िशन ऐसी माकूल है जो कि दुनिया में हर एक हक़ पसन्द इख़्तियार करता चला आया है।
  9. अख़लाक़ न बरतेंगे मुदारा न करेंगे अब हम किसी शख़्स की परवाह न करेंगे कुछ लोग कई लफ़्ज़ ग़लत बोल रहे हैं इसलाह मगर हम भी अब इसलाह न करेंगेकमगोई के एक वस्फ़-ए-हिमाक़त है बहर तो कमगोई को अपनाएँगे चहका न करेंगेअब सहल पसंदी को बनाएँगे वातिरा ता देर किसी बाब में सोचा न करेंगेग़ुस्सा भी है तहज़ीब-ए-तआल्लुक़ का तलबगार हम चुप हैं भरे बैठे हैं गुस्सा न करेंगेकल रात बहुत ग़ौर् किया है सो हम ए तय कर के उठे हैं के तमन्ना न करेंगे
  10. अख़लाक़ न बरतेंगे मुदारा न करेंगे अब हम किसी शख़्स की परवाह न करेंगे कुछ लोग कई लफ़्ज़ ग़लत बोल रहे हैं इसलाह मगर हम भी अब इसलाह न करेंगेकमगोई के एक वस्फ़-ए-हिमाक़त है बहर तो कमगोई को अपनाएँगे चहका न करेंगेअब सहल पसंदी को बनाएँगे वातिरा ता देर किसी बाब में सोचा न करेंगेग़ुस्सा भी है तहज़ीब-ए-तआल्लुक़ का तलबगार हम चुप हैं भरे बैठे हैं गुस्सा न करेंगेकल रात बहुत ग़ौर् किया है सो हम ए तय कर के उठे हैं के तमन्ना न करेंगे
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  7. इसलिए कि
  8. इसलिये
  9. इससे ऊपर
  10. इससे और आधिक सहमत नहीं हो सकता
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