उपमा अलंकार वाक्य
उच्चारण: [ upemaa alenkaar ]
उदाहरण वाक्य
- पूर्णोपमा (सं.) [सं-स्त्री.] (काव्यशास्त्र) उपमा अलंकार का एक भेद जिसमें उपमा अलंकार के चारों अंग उपमेय, उपमान, वाचक तथा साधारण धर्म विद्यमान होते हैं।
- इसके प्रमुख भेद है-१. उपमा २.रूपक ३.उत्प्रेक्षा ४.दृष्टान्त ५.संदेह ६.अतिशयोक्ति१.उपमा अलंकार:-जहाँ दो वस्तुओं में अन्तर रहते हुए भी आकृति एवं गुण की समता दिखाई जाय,वहाँ उपमा अलंकार होता है ।
- प्त आलेखसमझनें में चूक और ययाति के वंशज (7)मंगल अभियान, कृष-3 और क्रिकेट मैच (6)राजनीति में उपमा अलंकार (4)सट्टे का रिकार्ड भी सचिन के नाम (3)लोहिया नेहरू के पास छोटे भाई की तरह आये थे (2)
- प्त आलेखसमझनें में चूक और ययाति के वंशज (7)राजनीति में उपमा अलंकार (4)सट्टे का रिकार्ड भी सचिन के नाम (3)लोहिया नेहरू के पास छोटे भाई की तरह आये थे (2)चिल्लर भूकंप और खबरों के कोलाज (2)
- इसके प्रमुख भेद है-१. उपमा २.रूपक ३.उत्प्रेक्षा ४.दृष्टान्त ५.संदेह ६.अतिशयोक्ति १. उपमा अलंकार:-जहाँ दो वस्तुओं में अन्तर रहते हुए भी आकृति एवं गुण की समता दिखाई जाय,वहाँ उपमा अलंकार होता है ।
- इसके प्रमुख भेद है-१. उपमा २.रूपक ३.उत्प्रेक्षा ४.दृष्टान्त ५.संदेह ६.अतिशयोक्ति १. उपमा अलंकार:-जहाँ दो वस्तुओं में अन्तर रहते हुए भी आकृति एवं गुण की समता दिखाई जाय,वहाँ उपमा अलंकार होता है ।
- सर्वाधिक टिप्पणी प्राप्त आलेखसमझनें में चूक और ययाति के वंशज (7)राजनीति में उपमा अलंकार (4)सट्टे का रिकार्ड भी सचिन के नाम (3)लोहिया नेहरू के पास छोटे भाई की तरह आये थे (2)चिल्लर भूकंप और खबरों के कोलाज (2)
- मुझे जिस चीज़ ने आकर्षित किया, वह है उपमा अलंकार का बेजोड़ प्रयोग! और ये भी के आप का पूरा ध्यान प्रकृति की ओर रहता है:)))) कुछ पंक्तियाँ जिन पर नजर बार-बार जाती है-(१) मेरी पीठ पर क़लई लगाकर ख़ुद को भी देखोगे बहुत सच्चा....
- विद्यापति की मौलिकता इसमें निहित है कि इन्होने उन रचनाओं की विषय उपमा अलंकार परिवेश आदि का अन्धानुकरण न कर उसमें अपने दीर्ध जीवन का महत्वपूर्ण एवं मार्मिक नानाविध अनुभव एवं आस्था को अनुस्यूत कर अप्रतिम माधुर्य एवं असीम प्राणवत्ता से युक्त मातृभाषा में यो प्रस्तुत किया कि वह इनके हृदय से न: सृक वल्कु लबजही मानव के हृदय में प्रवेश कर जाता है।
- क्या करें जब आस्था का प्रश्न हो तो चुपचाप भी नहीं बैठा जा सकता न … मैंने तो अपने आपको रोकने की कई बार चेष्टा की लेकिन इसी मंच पर अनर्गल बातों की जो परंपरा प्रारम्भ हुई की मैं अपने आपको रोक ही नहीं पाया … अब मैं अपने होंठ सिल लूंगा लेकिन आप ही देखें न उपमा अलंकार का अतिशयोक्ति पूर्ण वर्णन तो अब भी हो रहा है ….