कश्मीर वादी वाक्य
उच्चारण: [ keshemir vaadi ]
उदाहरण वाक्य
- भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के तहत आने वाले आईआईएसएम को 1969 में खोला गया था, अगले कई साल यह किराए की हट में चलता रहा, फिर जब कश्मीर वादी आतंक के साए में गुम होने लगी तो यह संस्थान भी जैसे हाइबरनेशन में चला गया।
- एक मानवाधिकार संस्था द्वारा कश्मीर वादी में तलाश की गई 29 हजार के करीब गुमनाम कब्रों ने मुख्यमंत्री की मुसीबत इसलिए बढ़ाई है क्योंकि अभी तक राज्य सरकार कश्मीर में से सिर्फ 3 हजार लोगों के लापता होने की बात स्वीकार करती आई है, जबकि जिन परिवारों के सदस्य लापता हुए हैं।
- यहाँ कश्मीर वादी के इस सुदूर इलाके में राष्ट्रीय अखबार वैसे ही एक दिन विलंब से आते हैं और विगत कुछ दिनों से छब्बीस जनवरी के मद्देनजर से बढ़ी हुई चौकसी की वजह से अखबारों पे नजर नहीं फेर पा रहा था।...अचानक से कल निगाह पड़ी इस खबर पर तो धक्क से रह गयी धड़कनें एकदम से।
- यहाँ कश्मीर वादी के इस सुदूर इलाके में राष्ट्रीय अखबार वैसे ही एक दिन विलंब से आते हैं और विगत कुछ दिनों से छब्बीस जनवरी के मद्देनजर से बढ़ी हुई चौकसी की वजह से अखबारों पे नजर नहीं फेर पा रहा था।...अचानक से कल निगाह पड़ी इस खबर पर तो धक्क से रह गयी धड़कनें एकदम से।
- श्रीनगर में बैंक में नौकरी कर रहा था अभी कश्मीर वादी आतंकवाद की गिरफ्त में नहीं आई थी एक दिन अचानक तार मिला कि नयी नौकरी नागपुर में लग गयी है पागल खाना चौक के सामने बने संस्थान में २० अगस्त को हाज़िर होइए, जहाँ दो साल तक ट्रेनिंग दी जायेगी उन दिनों संस्थान की पत्रिका
- तो सुख़नवरी के उस खु़दा को उसके जन्म-दिवस पर याद करते हुये इन अनर्गल अलापों को अवकाश देता हूँ:-हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है, वो हर इक बात पर कहना कि यूँ होता तो क्या होता {*चिल्ले-कलाँ = दिसम्बर के उत्तरार्ध से लेकर जनवरी के आखिर तक चालिस दिनों का कश्मीर वादी के सबसे सर्द दिनों वाला मौसम}
- तो सुख़नवरी के उस खु़दा को उसके जन्म-दिवस पर याद करते हुये इन अनर्गल अलापों को अवकाश देता हूँ:-हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है, वो हर इक बात पर कहना कि यूँ होता तो क्या होता {*चिल्ले-कलाँ = दिसम्बर के उत्तरार्ध से लेकर जनवरी के आखिर तक चालिस दिनों का कश्मीर वादी के सबसे सर्द दिनों वाला मौसम} जरा सी नींद क्या है चीज पूछो इक सिपाही से व्यस्तता अपने चरम पर है।
- {कश्मीर की सर्दी को तीन हिस्सों में बाँटा गया है, जिसे यहाँ की स्थानीय भाषा में चिल्ले-कलाँ, चिल्ले-ख़ुर्द और चिल्ले-बछ पुकारते हैं | चिल्ले-कलाँ कश्मीर वादी का चालीस दिनों वाला सर्दी के मौसम का सबसे ठंढा हिस्सा है, जो अमूमन 21 दिसंबर से शुरू होता है और 29 जनवरी तक रहता है | ये कहानी बारह साल पहले कश्मीर में आई अब तक की सबसे प्रचंड सर्दी के उसी चालीस दिनों के अंतराल की है...
- और किस सबूत की जरूरत है इस हमले में अपने नामुराद पड़ोसी का हाथ होने में? हमले का मास्टर-माइंड अफ़जल गुरू भी तो पकड़ा गया चार दिन पहले | यहीं का तो था कमबख़्त, मेरे कंपनी-पोस्ट के नीचे सोपोर के एक गाँव का | सब कुछ तो स्वीकार्य कर लिया है उसने पूलिस के सामने | जाने हम इतने सॉफ्ट क्यों हैं? या फिर कश्मीर वादी का ये चिल्ले-कलाँ उधर हमारे आकाओं के निर्णय लेने की क्षमता पर भी काबिज़ हो रखा है?