काव्यालंकार वाक्य
उच्चारण: [ kaaveyaalenkaar ]
उदाहरण वाक्य
- काव्यालंकार सूत्र में उक्त सभी से भिन्न मत व्यक्त करते हुए कहते हैं-' रीतिरात्मा काव्यस्य ' ५ ३
- आचार्य रुद्रट के ग्रंथ का नाम काव्यालंकार है, जबकि आचार्य रुद्रभट्ट के ग्रंथ का नाम ‘ शृंगारतिलक ' है।
- अतएव लगता है कि दूसरी पंक्ति प्रतिलिपि करने में छूट गयी हो, जिसके आधार पर वर्तमान काव्यालंकार प्रकाशित हुआ है।
- आचार्य भामह के काव्यालंकार पर आचार्य उद्भट ने ‘ भामहविवरण ' नामक टीका लिखी थी, जो आज उपलब्ध नहीं है।
- 5. ‘ काव्यालंकार ' में पाँच वृत्तियों (शैलियों) का उल्लेख किया गया है-मधुरा, परुषा, प्रौढ़ा, ललिता और भद्रा ।
- अतएव लगता है कि दूसरी पंक्ति प्रतिलिपि करने में छूट गयी हो, जिसके आधार पर वर्तमान काव्यालंकार प्रकाशित हुआ है।
- इसके अतिरिक्त उनके अन्य ग्रंथ हैं-काव्य प्रभाकर (1905/1909), छंद सारावली (1917), अलंकार प्रश्नोत्तरी (1918), हिंदी काव्यालंकार (1918), काव्य प्रबंध (1918),
- काव्यशास्त्र के लिये कई नाम मिलते हैं, यथा-काव्यालंकार, अलंकार शास्त्र, सौन्दर्यशास्त्र, काव्यसौन्दर्यशास्त्र, साहित्यशास्त्र और क्रियाकल्प।
- आचार्य रुद्रट के ग्रंथ ‘ काव्यालंकार ' के तीन टीकाकारों का उल्लेख मिलता है-आचार्य वल्लभदेव, आचार्य नमिसाधु और आचार्य आशाधर।
- आचार्य भामह के काव्यालंकार पर आचार्य उद्भट ने ‘ भामहविवरण ' नामक टीका लिखी थी, जो आज उपलब्ध नहीं है।