काशीनरेश वाक्य
उच्चारण: [ kaashineresh ]
उदाहरण वाक्य
- उनकी रानी ने भी, जो काशीनरेश की कन्या थी, इस उदासी को देखा और अपनी दासी को आज्ञा दी कि वह राजा के मित्र विदूषक माणवक से इस उदासी का कारण पूछकर आए।
- को बनारस के टाउनहाल में जो व्याख्यान दिया था उसमें आपने महाराज काशीराज को ' हमारे पूजनीय काशीनरेश ' कह कर सम्बोधन किया था, जैसा कि ' नवजीवन ' समाचार-पत्र भाग 2, अंक 20 के देखने से विदित हो सकता है।
- ऐसे में मैंने और भांजे दुर्योधन ने यह निर्णय लिया है कि कुछ ही दिनों में काशीनरेश के दरबार में होने वाले राजाओं के सम्मलेन में हमलोग इस मामले को उठाएंगे और चाहेंगे कि श्रीकृष्ण को उनके इस अपराध के लिए घोर दंड मिले.
- ऐसे में मैंने और भांजे दुर्योधन ने यह निर्णय लिया है कि कुछ ही दिनों में काशीनरेश के दरबार में होने वाले राजाओं के सम्मलेन में हमलोग इस मामले को उठाएंगे और चाहेंगे कि श्रीकृष्ण को उनके इस अपराध के लिए घोर दंड मिले.
- मुझे याद है, एकबार दुशासन ने पितामह और काकाश्री विदुर के हस्ताक्षर फोर्ज कर काशीनरेश को पत्र लिखकर आग्रह किया कि वे भीम को काशी नगरी में प्रवेश की अनुमति न दें क्योंकि उसने गुरु द्रोण की पाठशाला में मेरी और दुशासन की कुटाई की थी.
- मुझे याद है, एकबार दुशासन ने पितामह और काकाश्री विदुर के हस्ताक्षर फोर्ज कर काशीनरेश को पत्र लिखकर आग्रह किया कि वे भीम को काशी नगरी में प्रवेश की अनुमति न दें क्योंकि उसने गुरु द्रोण की पाठशाला में मेरी और दुशासन की कुटाई की थी.
- 11 जनवरी, 1916 ई. के भारतमित्र में भी इसी विषय की संपादकीय टिप्पणी ऐसी निकली है कि ' मैथिलों और भूमिहारों के वैवाहिक सम्बन्ध होते हैं इससे भूमिहार काशीनरेश के ब्राह्मण होने में संदेह करना व्यर्थ है, संपादक महोदय को कान्यकुब्जों और सर्यूपारियों के साथ भूमिहार, जमींदारादि ब्राह्मणों के सम्बन्ध विदित न थे।
- जहाँ मूर्तिमान सदाशिव प्रसन्न वदन आशुतोष सकलसद्गुणैकरत्नाकर, विनयैकनिकेतन, निखिल विद्याविशारद, प्रशांतहृदय, गुणिजनसमाश्रय, धार्मिकप्रवर, काशीनरेश महाराजाधिराज श्रीमदीश्वरीप्रसादनारायणसिंह बहादुर और उनके कुमारोपम कुमार श्री प्रभुनारायणसिंह बहादुर दान धम्र्मसभा रामलीलादि के मिस धर्मोन्नति करते हुए और असत् कम्र्म नीहार को सूर्य की भाँति नाशते हुए पुत्र की तरह अपनी प्रजा का पालन करते हैं।
- मामाश्री का कहना था कि एक बार अगर यह बात फैला दी गई तो फिर लोग़ इनके पश्चाताप की बात नहीं करेंगे बल्कि यह सवाल उठाने लगेंगे कि काशीनरेश की पुत्रियों को किडनैप करके अपने भाई के साथ ज़बरदस्ती उनका विवाह कर देना नीतिगत सही कर्म था या नहीं? ऐसा होने से हर चाय-पान की दूकानों पर रोज पितामह की बेईज्ज़ती ख़राब होगी.
- मामाश्री का कहना था कि एक बार अगर यह बात फैला दी गई तो फिर लोग़ इनके पश्चाताप की बात नहीं करेंगे बल्कि यह सवाल उठाने लगेंगे कि काशीनरेश की पुत्रियों को किडनैप करके अपने भाई के साथ ज़बरदस्ती उनका विवाह कर देना नीतिगत सही कर्म था या नहीं? ऐसा होने से हर चाय-पान की दूकानों पर रोज पितामह की बेईज्ज़ती ख़राब होगी.