केवलज्ञान वाक्य
उच्चारण: [ keveljenyaan ]
उदाहरण वाक्य
- तीसरी परंपरा सिद्धसेन दिवाकर की है जिसके अनुसार केवलज्ञान में किसी प्रकार का अंतर नहीं होता, प्रत्युत ये दोनों अभिन्न होते हैं।
- इसकी ज्ञानों के भेदानुसार पांच उत्तर प्रकृतियां हैं, जिससे क्रमशः जीव का मतिज्ञान, श्रुतज्ञान, अवधिज्ञान, मनःपर्यय ज्ञान व केवलज्ञान आवृत होता है।
- हेमचंद्र के अनुसार इंद्रियजन्म, मतिज्ञान और परमार्थिक केवलज्ञान में सत्य की मात्रा में अंतर है, योग्यता अथवा गुण में नहीं।
- केवली ही ' सर्वज्ञ' के नाम से अभिहित होता है, क्योंकि केवलज्ञान का उदय होते ही उसके लिये कोई पदार्थ अज्ञात नहीं रह जाता।
- मेरा भाव है कि बाहुबली के समान तपस्या करूं और यहां प्रताप छात्रावास में खड़ा हो जाऊं जब तक केवलज्ञान नहीं हो जावे।
- हमें पढ़ें और ध्यान दें-निर्वाण लाडू एवं दीपमलिका भगवान महावीर के निर्वाण कल्याणक तथा गौतम गणधर के केवलज्ञान की भक्ति-पूजा का उत्सव है।
- भगवान् आत्मा केवलज्ञान की मूर्ती है और यह शरीर तो जड़-धूल है मिट्टी है शरीर को आत्मा का स्पर्श ही कहाँ है!!
- ब्राह्मी-सुन्दरी ने ही बाहुबली जैसे ध्यानस्थ महा तपस्वी को प्रतिबोध देकर जगाया और उन्हें अहंकार के हाथी से नीचे उतारकर केवलज्ञान का वरदान दिया।
- भूत, भविष्यत और वर्तमान तीनों कालों से संबंधित और तीनों लोकों में विद्यमान समग्र पदार्थों को युगपत् जानने वाला ज्ञान केवलज्ञान कहा गया है।
- लेकिन जो तपस्वी सारे बाहरी आक्रमणों को सुनते ही नहीं, देखते ही नहीं, वे केवलज्ञान प्राप्त कर लेते हैं और महावीर बन जाते हैं।