गायत्री छंद वाक्य
उच्चारण: [ gaaayetri chhend ]
उदाहरण वाक्य
- अब हम देखेंगे कि क्या गायत्री छंद में कोई छंदगत अशुद्धि वास्तव में ही मौजूद है या वहां भी कोई ऐसी ही बात है जिसे हम अपने पैमाने पर समझने की कोशिश रहे हैं जबकि हमें कोशिश यह करनी चाहिए कि उसे वेद मंत्रों की रचना करने वालों की दृष्टि से समझा जाए।
- हिमालय एवं सागर से ॐ मिलता है और गंगा की धारा आप को गायत्री छंद को देती है, गंगा में आप का रुख चाहे हिमालय की ओर हो या सागर की ओर हो, कोई फर्क नहीं पड़ता जो मिलना है वह मिल जाएगा यदि मन-बुद्धि में श्रद्धा की लहर हो ।
- श्री युधिश्ठिर मीमांसक ने ‘ ओरियंटल रिसर्च कान्फ्रेंस ‘ के सन 1978 में पूना में हुए अधिवेषन में पड़े अपने षोध निबंध में, जो कि संस्कृत में है, यह बात साफ़ तौर पर कही है कि 23 अक्षरों का ‘ निचृत गायत्री ‘ छंद 24 अक्षरों के षुद्ध गायत्री छंद की अपेक्षा नीचा और घटिया है।
- कल्पना कीजिए कि ‘‘ आठ आठ अक्षर के तीन चरण वाला गायत्री छंद मैंने निर्माण किया है ‘‘, यह कहने वाला विश्वामित्र गायत्री छंद कहने लगा और उसके प्रथम ही पाद में सात अक्षर कहें, तो यह ‘‘ प्रथमग्रासे मक्षिकापातः ‘‘ के समान होगा या नहीं? अतएव यही मानना पड़ता है कि उस समय आज हम इस प्रथम पाद को जैसा सप्ताक्षरी कहते हैं वैसा न कहते हुए ‘‘ तत्सवितुर्वरेणियम् ‘‘ ऐसा आठ अक्षरों का ही कहते होंगे।
- कल्पना कीजिए कि ‘‘ आठ आठ अक्षर के तीन चरण वाला गायत्री छंद मैंने निर्माण किया है ‘‘, यह कहने वाला विश्वामित्र गायत्री छंद कहने लगा और उसके प्रथम ही पाद में सात अक्षर कहें, तो यह ‘‘ प्रथमग्रासे मक्षिकापातः ‘‘ के समान होगा या नहीं? अतएव यही मानना पड़ता है कि उस समय आज हम इस प्रथम पाद को जैसा सप्ताक्षरी कहते हैं वैसा न कहते हुए ‘‘ तत्सवितुर्वरेणियम् ‘‘ ऐसा आठ अक्षरों का ही कहते होंगे।
- अब बाये से स्वास लिया दाये छोड़ा, दाये से लिया बाये छोड़ा | २-४ अनुलोम-विलोम प्राणायाम किया | जब स्वास लें तो उसमें ॐ स्वरूप इश्वर का नाम भरना है | स्वास लो और ॐ, ॐ परमात्म नमह २-५ बार फिर स्वास निकल दो | ऐसे २-५ प्राणायाम किया फिर दोनों नथुनों से स्वास लो | ये ॐकार मंत्र है, गायत्री छंद है, परमात्मा ऋषि हैं, अन्तर्यामी देवता हैं | हम इसका जप करते हैं बुद्धि शक्ति विकसित करने के लिए | ॐ ….