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गुणस्थान वाक्य

उच्चारण: [ gaunesthaan ]

उदाहरण वाक्य

  1. इन में गुणस्थान और मार्गणा क्रम से जीवों के औदयिक, औपशमिक, क्षायिक, क्षायोपशमिक और पारणामिक भावों के भेद-प्रभेदों और स्थितियों का निरूपण किया गया है।
  2. यहाँ इस बात का विवेचन किया गया है कि कौन सा कर्मबन्ध किस गुणस्थान और मार्गणा में संभव है अर्थात् कर्म बन्ध के स्वामी कौन से मार्गणास्थानवर्ती जीव हैं।
  3. यहाँ इस बात का विवेचन किया गया है कि कौन सा कर्मबन्ध किस गुणस्थान और मार्गणा में संभव है अर्थात् कर्म बन्ध के स्वामी कौन से मार्गणास्थानवर्ती जीव हैं।
  4. सूत्रकार ने एक जीव और नाना जीवों की अपेक्षा एक ही गुणस्थान और मार्गणा में रहने को जघन्य और उत्कृष्ट कालाधिक का निर्देश करते हुए अन्तरकाल का निरूपण किया है।
  5. सूत्रकार ने एक जीव और नाना जीवों की अपेक्षा एक ही गुणस्थान और मार्गणा में रहने को जघन्य और उत्कृष्ट कालाधिक का निर्देश करते हुए अन्तरकाल का निरूपण किया है।
  6. जहाँ प्रथम गुणस्थान में जीव की दृष्टि मिथ्या रहती है वहाँ दूसरे गुणस्थान में ऐसी दृष्टि का उल्लेख है जिसमें सम्यक्त्व से पतन और मिथ्यात्व की ओर उन्मुखता पायी जाती है।
  7. जहाँ प्रथम गुणस्थान में जीव की दृष्टि मिथ्या रहती है वहाँ दूसरे गुणस्थान में ऐसी दृष्टि का उल्लेख है जिसमें सम्यक्त्व से पतन और मिथ्यात्व की ओर उन्मुखता पायी जाती है।
  8. शास्त्रीय भाषा में दर्शन-विशुद्धि चौथे गुणस्थान स आठवें गुणस्थान के प्रथम भाग तक हो सकती है अर्थात सम्यग्दृष्टि सद्गृहस्थ की अवस्था से लेकर उत्कृष्ट मुनि की अवस्था तक यह विशुद्धि होती है।
  9. शास्त्रीय भाषा में दर्शन-विशुद्धि चौथे गुणस्थान स आठवें गुणस्थान के प्रथम भाग तक हो सकती है अर्थात सम्यग्दृष्टि सद्गृहस्थ की अवस्था से लेकर उत्कृष्ट मुनि की अवस्था तक यह विशुद्धि होती है।
  10. शास्त्रीय भाषा में दर्शन-विशुद्धि चौथे गुणस्थान स आठवें गुणस्थान के प्रथम भाग तक हो सकती है अर्थात सम्यग्दृष्टि सद्गृहस्थ की अवस्था से लेकर उत्कृष्ट मुनि की अवस्था तक यह विशुद्धि होती है।
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