गृत्समद वाक्य
उच्चारण: [ garitesmed ]
उदाहरण वाक्य
- (k) क्षत्रियकुल में जन्में शौनक ने ब्राह्मणत्व प्राप्त किया | (विष्णु पुराण ४. ८. १) वायु, विष्णु और हरिवंश पुराण कहते हैं कि शौनक ऋषि के पुत्र कर्म भेद से ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र वर्ण के हुए | इसी प्रकार गृत्समद, गृत्समति और वीतहव्य के उदाहरण हैं |
- भरतवंश शिरोमणि भीष्म जी के दर्शन के लिये उस समय नारद, धौम्य, पर्वतमुनि, वेदव्यास, वृहदस्व, भारद्वाज, वशिष्ठ, त्रित, इन्द्रमद, परशुराम, गृत्समद, असित, गौतम, अत्रि, सुदर्शन, काक्षीवान्, विश्वामित्र, शुकदेव, कश्यप, अंगिरा आदि सभी ब्रह्मर्षि, देवर्षि तथा राजर्षि अपने शिष्यों के साथ उपस्थित हुये।
- ' गृत्समद ' नाम में विद्यमान ' गृत्स ' और ' मद ' का, इस सन्दर्भ में पृथक-पृथक निर्वचन करते हुए कहा गया है कि शयन ही के समय वाक्, चक्षु इत्यादि इन्द्रियों के निगरण करने के कारण ' गृत्स ' है और रीति-क्रिया के समय वीर्यस्लखन रूप ' मद ' को उत्पन्न करने के कारण ' मद ' कहलाता है।
- महर्षि गृत्समद द्वारा इस असीम शून्य के आविष्कार के पश्चात् ही गणित व भौतिकी अस्तित्व में आये | ससीम मानव की मेधा असीम की और बढ़ी | सभ्यता को आगे चढ़ने का सोपान प्राप्त हुआ | संसार गणित पर आधारित है और गणित शून्य पर | मानव की ज्ञान व प्रकृति नियमन के चरमोत्कर्ष की युग-गाथा कम्प्युटर-विज्ञान भी तो शून्य आधारित सिद्धांत की भाषा-भूमि पर टिका है ;