चन्द्रघंटा वाक्य
उच्चारण: [ chenderghentaa ]
उदाहरण वाक्य
- मां चन्द्रघंटा अपने प्रिय वाहन सिंह पर आरूढ़ होकर अपने दस हाथों में खड्ग, तलवार, ढाल, गदा, पाश, त्रिशूल, चक्र,धनुष, भरे हुए तरकश लिए मंद मंद मुस्कुरा रही हैं.
- नवरात्रों में नौ दिन क्रमश शैलपुत्री, ब्रह्माचारिणी, चन्द्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्ययायनी, कालरात्रि, मां गौरी और सिद्धिदात्रि की पूजा की जाती है.
- माता चन्द्रघंटा युद्ध हेतु सदैव तत्पर रहती हैं यही कारण है कि माता के सम्मुख जैसे ही कोई भक्त प्रस्तुत होता है माता उसके रोग, शोक, भय, काम, क्रोध, अहंकार, मद आदि दैत्यों का नाश कर देती हैं।
- मार्कण्डेय पुराण के अनुसार नवरात्र के नौ दिनों में जिन नौ देवियों की पूजा अर्चना की जाती है उनके नाम हैं-शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री।
- मां चन्द्रघंटा अपने प्रिय वाहन सिंह पर आरूढ़ होकर अपने दस हाथों में खड्ग, तलवार, ढाल, गदा, पाश, त्रिशूल, चक्र, धनुष, भरे हुए तरकश लिए मंद मंद मुस्कुरा रही होती हैं.
- मंदिर में मां वैष्णवी की तरह एक गुफा बनाई गयी जिसमें दुर्गा जी की मूर्ति के साथ-साथ उनके नौ स्वरूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायिनी, महागौरी, कालरात्रि, सिद्धिदात्री की मूर्ति भी लगाई गयीं।
- मार्कण्डेय पुराण के ‘ देवी माहात्म्य ‘ खण्ड ‘ दुर्गा सप्तशती ‘ में वर्णित शक्ति की अधिष्ठात्री देवी के नवरूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कन्दमाता, कात्यायिनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिरात्री से सभी भलीभांति परिचित है।
- मंदिर के प्रबंधक हरि गोपाल ने बताया कि जीर्णोद्धार के बाद इस मंदिर में मां काली पहले से ही स्थापित थी बाद में सिद्धदात्री, शेरावाली, महागौरी, कालरात्रि, कात्यायनी, स्कन्दमाता, कुष्माण्डा, चन्द्रघंटा, शैलपुत्री, हनुमानजी, भैरव, शनि देव सहित शिव परिवार की मूर्तियां स्थापित की गईं।
- देवी चंद्रघंटा की मुद्रा सदैव युद्ध के लिए अभिमुख रहने की होती हैं, इनका उपासक सिंह की तरह पराक्रमी और निर्भय हो जाता है इनकी अराधना सद्य: फलदायी है, समस्त भक्त जनों को देवी चंद्रघंटा की वंदना करते हुए कहना चाहिए ” या देवी सर्वभूतेषु चन्द्रघंटा रूपेण संस्थिता. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ”..
- तृतीय नवरात्र-वर देंगी महाशक्ति चन्द्रघंटा तृतीय नवरात्र वर देंगी महाशक्ति चन्द्रघंटा मार्कंडेय पुराण के अनुसार तृतीय नवरात्र की देवी का नाम चंद्रघंटा देवी है, निगम ग्रंथों में निहित कथा के अनुसार जब भगवान् शिव ने देवी को समस्त विद्ययों का ज्ञान प्रदान करना शुरू किया तो देवी उस ज्ञान का तप के लिए प्रयोग करने लगी, लगातार आगम निगमों का ज्ञान प्राप्त कर द...