छन्दशास्त्र वाक्य
उच्चारण: [ chhendeshaasetr ]
उदाहरण वाक्य
- व्याकरण की बातें करते हुए इंशा जी की लेखनी आज के उन तमाम कवियों और शायरों को अपनी चपेट में ले लेती है जो छन्दशास्त्र के ज्ञान के बिना ही छंद पर छंद रचते जाते हैं
- तभी वे प्रकृत, अपभ्रंस, संस्कृत, कन्नड, मराठी, अंग्रेजी, हिन्दी तथा बंग्ला जैसी अनेक भाषाओं के ज्ञाता और व्याकरण, छन्दशास्त्र, न्याय, दर्शन, साहित्य और अध्यात्म के प्रकाण्ड विद्वान आचार्य बने।
- उनकी ही रचनात्मकता में, दोहा, चौपाई से मुक्त होकर 16, और 10 मात्राओं का अपना छन्द रच सकती थी, जिसमें छन्दशास्त्र के ज्ञान की जरूरत नहीं, किन्तु भाषा की लय और कथ्य के अनुरूप अपना ही छन्द तलाशने अर्थात् अभिव्यक्ति का अपना रूप तलाशने की जरूरत होती है।