ज़िन्दगी ज़िन्दगी वाक्य
उच्चारण: [ jeinedgai jeinedgai ]
उदाहरण वाक्य
- कितनी निश्छल हँसी होती है ना किसी भी किशोरी की आने वाले कल से अनजान मगर वो ही हँसी आप उम्र भर फिर चाहे कितना ही ढूंढते फिरो वो मासूमियत फिर नहीं मिलती इसलिए सहेज लो उन पलों को जिसमे ज़िन्दगी ज़िन्दगी से मिल रही हो अपनी संपूर्ण उन्मुक्तता के साथ.
- ======================================== आज की ज़िन्दगी ज़िन्दगी हँसती हुई मुरझा गयी ; चाँद पर बदली गहन आ छा गयी! यामिनी का रूप सारा हर लिया कामिनी को हाय विधवा कर दिया! आदमी की सब बहारें छीन लीं, उपवनों की फूल-कलियाँ बीन लीं! फट गया मन लहलहाते खेत का, बेरहम तूफ़ान आया रेत का!
- यही तो ज़िन्दगी है ज़िन्दगी ज़िन्दगी जाने तू क्या चाहती है जाने किस मोड़ पे मुझे लिए जा रही है मेरे खवाबो, मेरी तम्मनाओ को पीछे छोड़ जाने किस और चली जा रही है जाने कयों तु मेरी हर कोशिश को नाकाम करने में लगी है मुझसे तेरी जाने क्या दुश्मनी है कुछ पल तो मुझे चैन के लेने दे [...]
- कुछ ऐसे खास भी होते है जिनके स्मरण की अनुमति के बिना भोर अपनी लाली नहीं बिखेरती और जिनकी सहमति के बिना सुरमुई संध्या दबे पाँव अपने आप को स्याह रात्रि के आगोश में नहीं सिमटाती है और उससे आलिंगन बद्ध हो उसे अपना सर्वस्व सौंपकर पौ फटने तक उसी का चोला धारण करना नहीं स्वीकारती है।...... जिसके बिना ज़िन्दगी ज़िन्दगी नहीं होती है।
- यादों की हरी डालियों पर बातों की कोमल पत्तियाँ है ज़िन्दगी आसूँओं की बरसात में धुली उन पत्तियों की लताफत है ज़िन्दगी वक़्त की रफ़्तार से तेज़ है ज़िन्दगी नाज़ुक कभी चट्टान है ज़िन्दगी दरिया के पानी की तरह मगरूर है ज़िन्दगी खुदा की सनक है इंसानी दुआ है ज़िन्दगी जहां समझा शुरुआत है वहीँ ख़त्म मिली है ज़िन्दगी ज़िन्दगी तू ही बता क्या है ज़िन्दगी!!
- मुहब्बत की हीर … मुहब्बत से कोई रांझा हो सकता है कला से कोई शायर पर कला से कोई रांझा नहीं हो सकता शायर की नज्में शायर की शायरी क्यों नहीं बनती शायर की ज़िन्दगी ज़िन्दगी की खूबसूरती शायर की कला ही है शायरी लिखने की सोचता रहता हूँ कि किसी तरह शायरी की कला भी जीने की कला खूबसूरत जीने की कला हो जाये सोच सच भी तो हो जाती है …
- जग में हो उल्लास कारपोरेट ज़िन्दगी ज़िन्दगी के मायने कुछ धुंधलाने लगे है “फार्मोलों ”से आगे “बिज़नस सूट ”आने लगे है दफ्तरों से निकल बाहर पंहुचा है व्यापार “गोल्फ कोर्सों ” पे अब शामियाने सजे है हाई क्लास के “वाईनींग डायनिंग ”करे हैं बेकार “मिडनाईट आयल ” जलाने लगे है फलसफे नए रोज़ आने लगे है हो सच वो या सौदा भुनाने चले है खुदाई के बन्दे वहां तक है पहुंचे जहा रोज़ खुदा नए नज़र आने लगे है मायने ज़िन्दगी के धुंधलाने लगे है मायने ज़िन्दगी के भुलाने लगे है......