दिदार वाक्य
उच्चारण: [ didaar ]
उदाहरण वाक्य
- मैन दूसरि चूचि को उसके मुनह मैन थैलकर बोलि, “और पीजिये उनसले।” दूसरि को 8-10 बार हि चूसा फ़िर पीचे हो मेरि केले के खमबे सि चिकनि रानो को चीरकर फ़रोसक को पैत पर रख मेरि रानो को सहलते जन्नत का दिदार करते बोला, “हयेतुमहरि निना से ज़यादा मज़ा दे रहि है।
- प्रवीण परिहार इशक होता नही सभी के लिए इशक होता नही सभी के लिए, ये बना है किसी-किसी के लिए, कोई महबूब लाजमी नही आशिकी के लिए, महबूब का खयाल ही काफी है शायरी के लिए, उस खयाल को किसी रूह या सुरत की जरूरत नही होती, हम आँखें मूंद लेते है महबूब के दिदार के लिए।
- जख्मे मोहब्बत ले के निकला तेरी चौखट से अब तो हर चौखट हमे बिराने से लगते है भुल जाता जब भुलने की नौबत आती हमे आइना कहती है अभि भी तेरे दिवाने से लगते है दिल से हटती नही तुँ नजरे तरसती है दिदार को सपने आती है कम्बख्त जैसे बहलाने से लगते है कलियाँ तो बहुत है इस गलीयों मे मेरे महबुब जील्लते तेरी कर के मुझे …
- अल्लाह की इबादत का कारनामा ऐसा कि पहाड़ भी पसीज गया और खुदा के बंदे से अलग होने के गम में रो पड़ा, इस पहाड़ के आंसू आज भी ख्वाजा साहब की यादों को अपने दिल मे समेटे हुए है और इसी के चलते देश के कोने-कोने से हजारों अकिदतमंद इन आँसुओं के दिदार को अजमेर आते हैं और अल्लाह से पहाड़ जैसी खिदमत का मौका पाने की दुआ करते है।
- गाव सिंकदरा के पूर्व सरपंच गुरबाज सिंह बडैच ने बताया कि चेतंग नाले के पानी से उनके गाव के दिदार सिंह की तीन एकड़, दर्शनलाल की एक एकड़, विरसा सिंह की पाच एकड़, जरनैल सिंह की छह एकड़, अवतार सिंह की तीन एकड़, बिटटू हड़तान की सात एकड़ धान, दो एकड गन्ना, दो एकड़ चैरी, मेहरचंद की दो एकड़ धान की फसल डुबने से नष्ट हो गई।
- उजाला अंधेरा देख के उजाला की याद आती है, सुनहरी सुबह के वास्ते ये शाम जाती है, मुरजा जाते है कुछ फुल भी सन्नाटो में, औश की बुंद फिर उसकी गरीमा लाती है, चहरे पे उजाला पडे तो लगता है चमकने, तस्वीर भी फिर देख आयना, शरमाती है, उजालो में जब भी कर ले जो दिदार तेरा, रुह भी कभी नज्म, कभी गझल गाती है, उजालेमें जो भी होता है दिखता है जहांमे, अंधेरा तो सारी बातो को खुदसे छुपाती है।
- नीशीत जोशी 28. 11.11 ये चीराग अब बुजनेको है अब चाहे कुछ भी कहे जमाना यहां, नही भुलेगा प्यारका अफसाना यहां, शमा चाहे जलके बुझभी जाये अगर, महोब्बत में जलेगा ये परवाना यहां, चंद्रमा करे इन्तजार चांदनीका वहां, इन्तजार में जीये बनके दिवाना यहां, मै भी हूं पागल उनके प्यार में शायद, सोचता हूं जैसे कोइ हो मस्ताना यहां, दिदार के इन्तजारमें रहू कतारमे खडा, परदा हटे तो सीखलु मै मुश्काना यहां, ये चीराग अब बुजनेको है महफिलमे, अब तो छोड इस कदर तडपाना यहां ।
- न सोच, न दंग हो देख प्रिये यह कैसा सुहाना बसंत आया है, तेरे साथ मुझे भी आज मौसमने हसाया है, कुछ दफन हुयी बात आज सुन ले कानो मे, तेरे ही इस बेपन्हा प्यार ने मुझे बचाया है, कई बार पुछा धुमाके “ओर किसे चाहते हो”, आज कहता हूं तुझको ही दिल में बसाया है, तुम्हारे दिदार वास्ते बीताये अनगीनत दिन, विरहके सपनोने भी कइ रातो हमे जगाया है, न सोच, न दंग हो गालो पे हाथ दे कर इतना, ये मौसमने हर परदा तेरे सामने से हटाया है ।
- मु्झपे खुमारी छा रही थी और दोनो चुचिया कठोर होने लगी! मैने कहा कि जिजु आज रात भर मुझे जी भरकर चोदो,मेरी चुत बहुत दिनो से तड़प रही है लंड का दिदार करने के लिये!इसकी तड़प सान्त कर दो प्लीज! मैने पूछा कि क्या आप मेरी दीदी को डेली चोदते है तो वो बोले क्या करे ये मेरा लंड शान्त ही नही होता!किसि किसि दिन तो मै आपकी दीदी को रात रात भर चोदता रहता हु,जब भि मौका मिलता है मै चोद देता हु!नहाते वक्त चोदने मे मुझे और भी मजा आता है!
- बीन पीये अब यह एक गुनाह खुदाको मानना होगा, जान लेने वास्ते मुजको मारना होगा, मिलनकी घडी फिरसे खडी है सामने, महोब्बतका अंत फिरसे भापना होगा, शुक्रिया,आये,पर सफर है यह मौतकी, छोडके साथ मुजे तो अब जागना होगा, दिदार कैसे हो?डाल दिया परदा सामने, अब तुजे भुलजानेका नाटक करना होगा, सितमगर मुंह खोलने नही देते जहां मे, ऐ खुदा, अब तुम्हे दिलसे पुकारना होगा, जानता गर समंदर फसाता नही वो ऐसे, डुबा देनेके बाद उसे मेरे संग तैरना होगा, बीन पीये अब रहना है मदहोश मुजे तो, होंशको सुराहीमें अब मुजे उतारना होगा ।