धर्म के लक्षण वाक्य
उच्चारण: [ dherm k leksen ]
उदाहरण वाक्य
- अर्थात् धैर्य, क्षमा, मन को वश में रखना, चोरी न करना, बाहर भीतर से (शरीर की) पवित्रता रखना, इन्द्रियों को वश में रखना, सात्विक बुद्धि, सात्विक ज्ञान, सत्यवचन बोलना, क्रोध न करना, ये दस धर्म के लक्षण हैं।
- एंडोमेट्रियल अस्तर, एड्स आरोपण, वृद्धि डिम्बग्रंथि के रक्त के प्रवाह, बेहतर डिम्बग्रंथि प्रतिक्रिया, अधिक परिपक्व कूप, उच्च जीवित जन्म दर को बढ़ाने, जल्दी गर्भपात की रोकथाम, पुरुष शुक्राणु गिनती, गतिशीलता और आकारिकी, तनाव में कमी, विश्राम को बढ़ावा देने के, पूर्व मासिक धर्म के लक्षण की कमी, दुष्प्रभावों की कमी हार्मोन उपचार से वृद्धि हुई है.
- भाव और भावातीत को जानों मनुश्मृति-6. 29 में धर्म के लक्षण के रूप में जो बाते बताई गई हैं, उन बातों को गीता में ब्रह्मण के लक्षण के रूप में गीता सूत्र-18.42 में कही गई हैं जब की ब्रह्मण वह है जो ब्रह्म से परिपूर्ण हो-यह बात गीता सूत्र-2.46 में कही गई हैं ।
- एतच् चतुर्वधिं प्राहुः साक्षाद्धर्मस् य लक्षणत्॥ “ (मनु॰) अर्थात् ” श्रुति = वेद, स् मृति = वेदानुकूल आप् तोक् त मनुस् मृत् यादि शास् त्र, सत्पुरुषों का आचार जो सनातन अर्थात् वेद द्वारा परमेश् वरोक् त प्रतिपादित कर्म् म और अपने आत् मा में प्रिय, अर्थात् जिसको आत् मा चाहता है, जैसा कि सत् यभाषण-ये चार धर्म के लक्षण अर्थात् इन् हीं से धर्म् माधर्म् म का निश् चय होता है।
- (मनुस् मृति) (दस धर्म के लक्षण हैं: धैर्य रखना, क्षमा करना, संयम रखना, चोरी न करना, शौच (स्वच्छता), इन्द्रियों को वश मे रखना, बुद्धि निर्मल रखना, विद्या प्राप्ति के लिए प्रत्न्शील रहना, सत्य और क्रोध न करना) इसमें शराब या अफीम कहाँ है मुझे नहीं पता … भारतीय इतिहास में भी कही किसी को हिन्दू बनाने के लिए षड्यंत्र क़त्ल किये गए हों मैंने नहीं सुना..