निराला की साहित्य साधना वाक्य
उच्चारण: [ niraalaa ki saahitey saadhenaa ]
उदाहरण वाक्य
- वो गीत जो उन्होंने अपनी पत्नी से सीखा था-“ श्री राम चन्द्र कृपालु भज मन हरण भव भय दारुणं ” जिसने उनके प्राणों में नया उत्साह भर दिया था. (‘ निराला की साहित्य साधना-१: राम विलास शर्मा)
- निराला की साहित्य साधना पढ़ें … सामाजिक अध्ययन के विषयों पर शर्मा के लिखे को पढ़ कर ही मूल्य-निर्णय देने की स्थिति में हैं गिरीश मिश्र … जबकि नामवर के साथ इन्होने पान की गुमटी पर पान खाते हुए अमृत-वचन का पान किया है ….
- ' ' रामविलास शर्मा के ' साहित्यिक लेखन के बारे में नहीं जानने वाले ' गिरीश मिश्र ने यह कैसे जाना कि निराला पर डॉ शर्मा ने ' एक सर्वाधिक महत्वपूर्ण रचना ' लिखी है? ' निराला की साहित्य साधना भाग-1 ' का प्रकाशन 1969 ई. में हुआ था।
- रचना-कर्म:-आलोचना ग्रन्थ:-प्रेमचंद,प्रेमचंद और उनका युग,भारतेंदु युग और हिन्दी भाषा की विकास परम्परा,आचार्य रामचंद शुक्ल और हिन्दी आलोचना, निराला की साहित्य साधना (तीन-भाग),महावीर प्रसाद द्विवेदी और हिन्दी नवजागरण,भारतीय साहित्य की भूमिका, पम्परा का मूल्यांकन ।
- रचना-कर्म:-आलोचना ग्रन्थ:-प्रेमचंद, प्रेमचंद और उनका युग, भारतेंदु युग और हिन्दी भाषा की विकास परम्परा, आचार्य रामचंद शुक्ल और हिन्दी आलोचना, निराला की साहित्य साधना (तीन-भाग), महावीर प्रसाद द्विवेदी और हिन्दी नवजागरण, भारतीय साहित्य की भूमिका, पम्परा का मूल्यांकन ।
- निराला की साहित्य साधना के प्रथम खंड में वे एक महत्वपूर्ण तथ्य उद्घाटित करते हैं, कि निराला के साहित्य में निरुपित प्रेम व कामुकता के सन्दर्भ में उनका स्वयं पर मुग्ध होना और उसी मुग्धता के आलम में स्वयं को विविध रूपों में चित्रित करना उनके उदार कवि व्यक्तित्व का परिचायक है. '' निराला अर्धनारीश्वर थे.