परशुराम चतुर्वेदी वाक्य
उच्चारण: [ pershuraam cheturevedi ]
उदाहरण वाक्य
- यह सब इस लिए नहीं हुआ तो शायद इस लिए भी कि हिंदी की दुकानों और आचार्य परशुराम चतुर्वेदी के नाम पर चंदा नहीं मिलता और बिना चंदा और अनुदान के आयोजनों की परंपरा अब नहीं रही।
- श्री परशुराम चतुर्वेदी ने लिखा है कि “आख्यायिका” की विशेषता इस बात में पाई जाती है कि वह स्वयं किसी अपने पात्र द्वारा ही कही गई होती है जिस कारण उसकी बहुत सी बातें आत्मोद्गारपरक बन जाती हैं।
- श्री परशुराम चतुर्वेदी ने लिखा है कि “आख्यायिका” की विशेषता इस बात में पाई जाती है कि वह स्वयं किसी अपने पात्र द्वारा ही कही गई होती है जिस कारण उसकी बहुत सी बातें आत्मोद्गारपरक बन जाती हैं।
- आचार्य चतुर्वेदी भी बलिया के थे और यह कवि भी बलिया के हैं मैं ने उन से पूछा, ‘ आचार्य परशुराम चतुर्वेदी को जानते हैं? ' वह लपक कर बोले, ‘ हां, जानता हूं।
- उत्तरी भारत की सन्त परम्परा, पृ ० ५ ० १ ४ ६. परशुराम चतुर्वेदी, सन्त काव्यधारा, किताब महल, इलाहाबाद, १ ९ ५ २, पृ ० ३ ६ २ ४ ७.
- पर यह सुखद ही था कि उनके पोते असित चतुर्वेदी जो पेशे से वकील (आचार्य परशुराम चतुर्वेदी भी पेशे से वकील थे) हैं पर ‘ लेखन कर्म ' से उन का दूर-दूर तक उन का नाता नहीं है।
- आचार्य परशुराम चतुर्वेदी इस पर की व्याख्या में लिखते हैं कि यह दाम्पत्यभाव की वियोगावस्था की प्रतीक योजना है जिसमें ” विवाह विधि के संपन्न होते ही, वैधव्य के अनुभव का दु: ख उलट वाँसी के द्वारा बतलाया है।
- शोध सूत्रों के आधार पर इसी तरह ब्रह्मदेश] इण्डोनेशिया] मध्य जावा] बाली द्वीप] सिंहल देश] अरब ईरान] यूरोप आदि में रामकथा की मौजूदगी और लोकप्रियता की जानकारी परशुराम चतुर्वेदी ने अपनी पुस्तक 'भारतीय संस्कृति विश्व मंच पर' में विस्तार से दी है।
- हालां कि कबीर आचार्य परशुराम चतुर्वेदी के आदर्श थे पर कबीर ही क्यों? दादू, दुखहरन, धरनीदास, भीखराम, टेराम, पलटू जैसे तमाम विलुप्त हो चुके संत कवियों को उन्होंने जाने कहां-कहां से खोजा, निकाला और उन्हें प्रतिष्ठापित किया।
- उक्त कार्यक्रम का आयोजन संस्कृति निलयम् द्वारा भारतीय लेखिका परिषद, नव परिमल, ज्ञानप्रसार संस्थान, आ 0 परशुराम चतुर्वेदी स्मारक एवं समारोह समिति, कादम्बिनी क्लब, भारतीय भाषा प्रतिष्ठान परिषद, जागो भारत महान, लखनऊ वीमेन्स एसोसिएशन के सहयोग से किया गया।