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प्राणमय कोश वाक्य

उच्चारण: [ peraanemy kosh ]

उदाहरण वाक्य

  1. इन अन्नमय कोश में संचरित प्राण, अपान, उदान, व्यान, समान इन पंच प्राणों पंच उपप्राणों आदि प्राणवायु के सभी शरीरस्थ रूपों का समुच्चय प्राणमय कोश है ।
  2. प्राणों का कार्य प्राणामय कोश से सम्बन्धित है और प्राणायाम इन्हीं प्राणों एवं प्राणमय कोश को शुद्ध, स्वस्थ और नीरोग रखने का प्रमुख कार्य करता है, इसलिए प्राणायाम का सर्वधिक महत्त्व और उपयोग भी है।
  3. जिस प्रकार सभी संस्कार प्रकृति के कार्य को सहायता पहुँचाने के लिए बने हैं, उसी प्रकार प्रेत क्रिया का भी उद्देश्य यही है कि वह प्राणमय कोश की, अन्नमय कोश के यथावत रहने के समय तक उस पर अवलंबित रहने की प्रकृति को नष्ट कर दे और जब तक प्रकृति अपनी साधारण प्रक्रिया में पहुँचाना चाहे, उस मनुष्य को भूलोक में इस प्रकार धारण किए रहे।
  4. जिस प्रकार सभी संस्कार प्रकृति के कार्य को सहायता पहुँचाने के लिए बने हैं, उसी प्रकार प्रेत क्रिया का भी उद्देश्य यही है कि वह प्राणमय कोश की, अन्नमय कोश के यथावत रहने के समय तक उस पर अवलंबित रहने की प्रकृति को नष्ट कर दे और जब तक प्रकृति अपनी साधारण प्रक्रिया में पहुँचाना चाहे, उस मनुष्य को भूलोक में इस प्रकार धारण किए रहे।
  5. देखा है सभी ने पागल गायों का सरकारी कत्ल, मांसाहार के कारण, मानव भी तो होता ही होगा प्रभावित मांसाहार से, वरना शास्त्र क्यों करते बखान सात्विक आहार का, शाकाहार का! टकराती है ध्वनि शरीर से, मोटी त्वचा से लौट जाती है, व्यर्थ जाता है सारा जाप कैसे हो पाएगा पार सेतु प्राणमय कोश का? कहते हंै कि भाव के भूखे हैं भगवान, और वही बैठे हैं मन के भीतर, महत्व है भावों का भोजन से अधिक, भाव ही स्वभाव है।
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