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प्रातिशाख्य वाक्य

उच्चारण: [ peraatishaakhey ]

उदाहरण वाक्य

  1. प्रातिशाख्यों में ऋप्रातिशाख्य (शौनक), शुक्लयजुः प्रातिशाख्य (कात्यायन), मैत्रायणी प्रातिशाख्य आदि प्रमुख हैं और शिक्षाग्रन्थों (ध्वनिशास्त्रों) केनिर्माताओं मे याज्ञवल्क्य, व्यास, वसिष्ठ आदि विख्यात हैं.
  2. प्रातिशाख्यों में ऋप्रातिशाख्य (शौनक), शुक्लयजुः प्रातिशाख्य(कात्यायन), मैत्रायणी प्रातिशाख्य आदि प्रमुख हैं और शिक्षाग्रन्थों (ध्वनिशास्त्रों) के निर्माताओं मे याज्ञवल्क्य, व्यास, वसिष्ठ आदि विख्यात हैं।
  3. श्रौत सूत्र, धर्म सूत्र, गृहस्थसूत्र, प्रातिशाख्य सूत्र भी इसी शैली में है किंतु पाणिनि के सूत्रों में जो निखार है वह अन्यत्र नहीं है।
  4. श्रौत सूत्र, धर्म सूत्र, गृहस्थसूत्र, प्रातिशाख्य सूत्र भी इसी शैली में है किंतु पाणिनि के सूत्रों में जो निखार है वह अन्यत्र नहीं है।
  5. श्रौत सूत्र, धर्म सूत्र, गृहस्थसूत्र, प्रातिशाख्य सूत्र भी इसी शैली में है किंतु पाणिनि के सूत्रों में जो निखार है वह अन्यत्र नहीं है।
  6. ध्वनियों के बारे में हमें संस्कृत का सहारा लेना पड़ेगा क्योंकि संस्कृत में ध्वनि विज्ञान का सर्वोत्कृष्ट अध्ययन प्रस्तुत किया गया है (ऋक् प्रातिशाख्य) ।
  7. इस आरण्यक को निरुक्त से प्राचीन मानने का कारण यह है कि इसके तृतीय खंड का प्रतिपाद्य विषय, जो वैदिक व्याकरण है, प्रातिशाख्य तथा निरुक्त दोनों के तद्विषयक विवरण से नि:संदेह प्राचीन है।
  8. प्रातिशाख्य (सं.) [सं-पु.] ऐसा ग्रंथ जिसमें वेदों की किसी शाखा के स्वर, पद, संहिता, संयुक्त वर्णों के उच्चारण आदि पर विचार किया जाता है।
  9. इस प्रातिशाख्य का एक वैशिष्ट्य यह भी है कि इसमें पाणिनि की घु, घ जैसी संज्ञाओं के समान 'सिम्' (उसमानाक्ष), 'जित्' (क, ख, च, छ आदि) आदि अनेक कृत्रिम संज्ञाएँ दी हुई हैं।
  10. इस प्रातिशाख्य का एक वैशिष्ट्य यह भी है कि इसमें पाणिनि की घु, घ जैसी संज्ञाओं के समान “सिम्' (उसमानाक्ष), ”जित्' (क, ख, च, छ आदि) आदि अनेक कृत्रिम संज्ञाएँ दी हुई हैं।
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