बिहारी भाषा वाक्य
उच्चारण: [ bihaari bhaasaa ]
उदाहरण वाक्य
- आपको भाषा उच्चारण की समस्या नहीं आती? पंजाबी में तो कोई समस्या ही नहीं थी लेकिन बिहारी भाषा के उच्चारण के लिए हमारे यहाँ बकायदा एक कार्यशाला आयोजित की गयी थी और अब भी बिहार से ताल्लुक रखने वाले लेकिन राष्ट्रीय नाट्य संस्थान के प्रकाश जी हमें इसमें उच्चारण के लिए मदद करते हैं ।
- डॉ अमर कुमार की मस्त बिहारी भाषा में बिहारी बाबू के साथ संवाद आनंद दायक रहे! श्रेय संवेदना के स्वर को देता हूँ! डॉ अमर कुमार की बात एवं उद्धरणों से काफी हद तक सहमत हूँ! हमारी यह विसंगतियां काफिरों को मौका देती हैं कि हम इसे केंद्र बिंदु बना कर बहस छेड़ें...
- तो भला किसी बिहारी से कोई क्यों यह उम्मीद करता है कि वह बिहारी बोली छोड़कर किसी अन्य की बोली अपनाये? मुझे इस बात का गर्व है कि मैं 8 सालों से बिहार से बाहर रह रहा हूं मगर अभी तक मैं बिहारी भाषा और टोन नहीं छोड़ा हूं, साथ ही मैं अमेरिकन और ब्रिटिश एक्सेंट वाली अंग्रेजी भी उतने ही अधिकार से भी बोलता हूं..
- इस एक साल के सफ़र ने, आपने कई आयाम कायम किये हैं भाई! जिनमें बिहारी भाषा को हिंदी जगत में सम्मान दिलाना सबसे दुष्कर कार्य था जिसे आपने अपनी सरस और माधुर्य से बहुत आसान बना दिया! शायद कोई और ब्लोगर यह काम करने का बीड़ा उठाता तो उसे कुछ समय में ब्लॉग को ही बंद कर जाना पड़ता! आशा है इस प्रकाश को यूँ ही बिखेरते रहोगे! शुभाशीष
- गुजरात में ज्यादातर संयुक्त परिवार होते हैं और आज भी वहाँ बुजुर्ग हेड ऑफ द फैमिली होते हैं. उनका रूतबा भी होता है...और उनकी इज्जत और देखभाल बड़े प्यार से की जाती है,वही पुराने पड़ गए पांच रुपये के नोट की तरह.इस पोस्ट में एक बात और नोटिस की...भाषा का प्रवाह ज्यादा अच्छा लगा....और बिहारी भाषा लिखने की ज्यादा कोशिश नहीं दीखी...जो भी शब्द आए..अपनी सहजता से आए.प्रत्युत्तर देंहटाएं
- ऐसा ही एक किस्सा मेरे घर काम करने वाली सुमति से ताल्लुक रखता है. सुमति बिहार की है और मुझे उसकी बिहारी भाषा बहुत रोचक लगती है.एक दिन वो बातों बातों में किसी रिश्तेदार से हुई भेंट का ज़िक्र करते हुए बोली,“ऊ तो हुमको बदवे ही मिल गईल”.दिमाग पर बहुत ज़ोर लगाने पर भी जब हमको बदवे शब्द का मतलब समझ नहीं आया तो शाम को सुमति से ही हमने इस खास शब्द पर प्रकाश डालने का आग्रह किया.
- क्योंकि लड़कीवाले पुरुषार्थ प्रेमी एवं “अवकाश प्राप्त मुख्य सचिव ऑफ़ कुटाई समिति थे. चूकि दोनों पक्ष गरम दल से तलुकात रखते थे इसलिए बाराती साइड किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए ”लाठी डंडा” या फ़िर बिहारी भाषा मे “दुःख हरण ” का भरपूर इन्तजाम परंपरागत रूप से किया गया. अब “मोहबिया ” की बारात निकली.आज की तुलना मे पहले समय की कमी नही होने से बारात दो तीन रोज टिकती थी.यह बारात दो दिनों वाली थी.
- क्योंकि लड़कीवाले पुरुषार्थ प्रेमी एवं “अवकाश प्राप्त मुख्य सचिव ऑफ़ कुटाई समिति थे. चूकि दोनों पक्ष गरम दल से तलुकात रखते थे इसलिए बाराती साइड किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए ”लाठी डंडा” या फ़िर बिहारी भाषा मे “दुःख हरण ” का भरपूर इन्तजाम परंपरागत रूप से किया गया. अब “मोहबिया ” की बारात निकली.आज की तुलना मे पहले समय की कमी नही होने से बारात दो तीन रोज टिकती थी.यह बारात दो दिनों वाली थी.