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बृहदारण्यकोपनिषद वाक्य

उच्चारण: [ berihedaarenyekopenised ]

उदाहरण वाक्य

  1. जिसे हम ईशोपनिषद कहते हैं वह वास्तव में यजुर्वेद का चालीसवां यानी आखिरी अध्याय है और जिसे हम बृहदारण्यकोपनिषद कहते हैं वह असलियत में शतपथ ब्राह्मण का आखिरी अध्याय है।
  2. बृहदारण्यकोपनिषद के चौथे ब्राह्मण में चक्र के पुत्र उषस्त ऋषि याज्ञवल्क्य से प्रश्न करते हैं कि ब्रह्म क्या है और जो जीवों में स्थित आत्मा है उसके विषय का ज्ञान दें.
  3. बृहदारण्यकोपनिषद चौथे ब्राह्मण में छह ब्राह्मण हैं इसमें महर्षि याज्ञवल्क्य एवं राजा जनक के मध्य हुए वार्तालाप का उल्लेख किया गया है इसके साथ ही साथ याज्ञवल्क्य तथा मैत्रेयी के संवाद भी हैं.
  4. बृहदारण्यकोपनिषद के दूसरे ब्राह्मण में जरत्कारू के पुत्र आर्तभाग और ऋषि याज्ञवल्क्य के मध्य शास्त्रार्थ होता है आर्तभाग ऋषि याज्ञवल्क्य से पूछते हैं हे ऋषिवर ग्रहों व अतिग्रहों की संख्या कितनी होती है तथा कौन-कौन से हैं.
  5. बृहदारण्यकोपनिषद के चौथे ब्राह्मण में सन्तान प्राप्ति हेतु मन्त्रों का विवरण दिया गया है इन मन्त्रों द्वारा गर्भ धारण करना, गर्भ निरोध करना एवं स्त्री प्रसंग को भी यज्ञ प्रक्रिया के रूप में उल्लेखित किया गया है.
  6. बृहदारण्यकोपनिषद शुक्ल यजुर्वेद की काण्व शाखा के अन्तर्गत आने वाला उपनिषद है यह एक बहुत बडा़ उपनिषद है जिस कारण इसे ‘ बृहत ' यानी के बड़ा व ‘ आरण्यक ' यानी के वन अर्थात बृहदारण्यकोपनिषद कहा गया है.
  7. बृहदारण्यकोपनिषद शुक्ल यजुर्वेद की काण्व शाखा के अन्तर्गत आने वाला उपनिषद है यह एक बहुत बडा़ उपनिषद है जिस कारण इसे ‘ बृहत ' यानी के बड़ा व ‘ आरण्यक ' यानी के वन अर्थात बृहदारण्यकोपनिषद कहा गया है.
  8. बृहदारण्यकोपनिषद के प्रथम ब्राह्मण में सबसे पहले यज्ञ के होता अश्वल उनसे प्रश्न करते हैं वह कहते हैं हे मुनिवर जब सभी कुछ मृत्यु के अधीन है तो कैसे केवल यजमान ही मृत्यु के बन्धन का अतिक्रमण कर सकता है?
  9. बृहदारण्यकोपनिषद के इस अध्याय में प्राण तत्व की श्रेष्ठता का उल्लेख प्रस्तुत किया गया है इसके साथ ही पंचाग्नि विद्या, मन्थ विद्या उपदेश तथा संतानोत्पत्ति विज्ञान को बहुत ही प्रभावशाली ढंग से व्यक्त किया गया है इस अध्याय में पांच ब्राह्मण हैं.
  10. बृहदारण्यकोपनिषद के इन दोनों ब्राह्मणों में हृदय एवं सत्य को व्यक्त किया गया है इस हृदय को प्रजापति कहा गया है जिनके तीनों अक्षर मिलकर इसे परिभाषित करते हैं जिसमें “ हृ ” से अर्थ हरणशील है यह कहीं से भी अभीष्ट पदार्थ का हरण करता है.
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