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ब्रजबुलि वाक्य

उच्चारण: [ berjebuli ]

उदाहरण वाक्य

  1. धार्मिक-विकास के इतिहास के अनुसार अठारहवीं शताब्दी आते-आते मणिपुर के मन्दिरों में ब्रजबुलि के नाम से पदों का गायन होने लगा था ।
  2. व्याकरण संबंधी दोनों की अपनी-अपनी अलग-अलग विशेषताएँ हैं, वैसे भाषातत्तव की दृष्टि से यह स्वीकार किया जाता है कि ब्रजबुलि का संबंध ब्रजभाषा से है।
  3. बंगाल और उड़ीसा का वैष्णव-शक्ति-साहित्य राधा और कृष्ण की लीलाओं से ओतप्रोत है, लेकिन असमी के ब्रजबुलि साहित्य में राधा का वैसा स्थान नहीं दिया गया है।
  4. इस अवसर पर रवीन्द्र संगीत गायिका श्रीमती पपिया चन्द्रा ने गुरुदेव रवीन्द्र के ब्रजबुलि में रचित पदों का गायन कर सिद्ध किया कि श्री टैगोर को ब्रज संस्कृति से गहरा लगाव था।
  5. ब्रजबुलि उस काव्यभाषा का नाम है जिसका उपयोग उत्तर भारत के पूर्वी प्रदेशों अर्थात् मिथिला, बंगाल, आसाम तथा उड़ीसा के भक्त कवि प्रधान रूप से कृष्ण की लीलाओं के वर्णन के लिए करते रहे हैं।
  6. इनके ब्रजबुलि नामकरण का प्रश्न तो भाषा वैज्ञानिकों के विचार का विषय है, किन्तु इतना अनुमान अवश्य किया जा सकता है कि इसके मूल में राधा-कृष्ण की लीला-भूमि, ब्रज क्षेत्र और ब्रज-भाषा की भूमिका रही होगी ।
  7. धार्मिक प्रभाव के कारण वैष्णवी व्यापारों में प्रयुक्त संस्कृत को छोड़ कर शेष सभी के लिये ब्रजबोली का प्रयोग चल पड़ा होगा, इसीलिये विद्यापति के जो पद बंगाल होते हुए मणिपुर पहुंचे, उन्हें भी ब्रजबोली कहने के उद्देश्य से भाषिक उच्चारणगत कारणों से, ब्रजबुलि पुकारा गया ।
  8. जब हम सृजनात्मक सामग्री की बात करते हैं तब मध्यकालीन साहित्य में मीराँ के पदों में कुछ गुजराती के पद शामिल करने चाहिए या कृष्ण भक्ति परंपरा में दयाराम अथवा बंगाल के वैष्णव भक्त (ब्रजबुलि) शामिल करने चाहिए, अथवा भक्ति की अलग-अलग धाराओं के भारतीय कवियों की रचनाओं को अनुवाद में ही सही पर शामिल करना चाहिए।
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