ब्रह्म सूत्र वाक्य
उच्चारण: [ berhem suter ]
उदाहरण वाक्य
- संन्यासी, भिक्षु कहलाते हैं एवं उन्हीं के अध्ययन योग्य उपनिषदों पर आधारिक पराशर्य (पराशर पुत्र व्यास) द्वारा विरचित ब्रह्म सूत्र है, जो कि बहुत प्राचीन है।
- वेद व्यास का ब्रह्म सूत्र कहता है, “भगवान किसी को सुख और दुःख देने में पक्षपाती नहीं है, बल्कि वह व्यक्ति के कर्म के फल प्रदान करता है.”
- एक मंदिर में एक महात्मा जी कह रहे हैं-‘ एकम् ब्रह्म द्वितीयो नास्ति, नेह, ना, नास्ति किंचन ‘ यह ब्रह्म सूत्र वेदों का सार है।
- संन्यासी, भिक्षु कहलाते हैं एवं उन्हीं के अध्ययन योग्य उपनिषदों पर आधारिक पराशर्य (पराशर पुत्र व्यास) द्वारा विरचित ब्रह्म सूत्र है, जो कि बहुत प्राचीन है।
- ब्रह्म सूत्र के अध्याय 2 पर अपनी टिप्पणी में शिवानंद आगे कहते हैं कि कर्म के संबंध में भगवान की स्थिति को बारिश के सादृश्य के माध्यम से समझाया जा सकता है.
- ब्रह्म सूत्र के अध्याय 3 पर अपनी टिप्पणी में शिवानंद ने उल्लेख किया कि कर्म जड़ और क्षणभंगुर होता है, और किसी काम के निष्पादित हो जाने के बाद उसका अस्तित्व समाप्त हो जाता है.
- इसके बाद उन्होंने ब्रह्म सूत्र, भगवद्गीता, और ११ उपनिषदों (कठ, केन, माण्डूक्य, ईशावास्य, प्रश्न, तैत्तिरीय, ऐतरेय, श्वेताश्वतर, छान्दोग्य, बृहदारण्यक और मुण्डक) पर संस्कृत में श्रीराघवकृपाभाष्य की रचना की।
- आदि शंकराचार्य ने ब्रह्म सूत्र, उपनिषद और श्रीमद्भगवद् गीता पर भाष्य लिखकर अद्वैत मत का जो प्रतिपादन किया उसका भारतीय दर्शन के विकास में इतना प्रभाव पड़ा है कि इन ग्रन्थों को ही 'प्रस्थान त्रयी' के नाम से जाना जाने लगा।
- वैष्णव धर्म संबंधी दृष्टि से ब्रह्म सूत्र की रामानुज की व्याख्या, के रूप में समझ जाएगी, श्री भाष्य में, वे ब्राह्मण को विष्णु के रूप में देखते हैं, जो अलग-अलग आत्माओं के विभिन्न कर्मों के समनुरूपता में विविधता को क्रमबद्ध करता है.
- आदि शंकराचार्य ने ब्रह्म सूत्र, उपनिषद और श्रीमद्भगवद् गीता पर भाष्य लिख कर अद्वैत मत का जो प्रतिपादन किया उसका भारतीय दर्शन के विकास में इतना प्रभाव पड़ा है कि इन ग्रन्थों को ही 'प्रस्थान त्रयी' के नाम से जाना जाने लगा।