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भरतवंशी वाक्य

उच्चारण: [ bhertevneshi ]

उदाहरण वाक्य

  1. दूसरे दिन छोटी दिवाली या नरकासुर चतुर्दशी मनाने की परंपरा है, जिसे नरक नाम के असुर को भगवान श्री कृष्ण द्वारा दिए गए वचन के अनुपालन में समस्त भरतवंशी हजारों वर्षों से बड़ी श्रद्धा से निभाते चले आ रहे हैं।
  2. छित्त्वैनं संशयं योगमातिष्ठोत्तिष्ठ भारत॥ ४ / ४ २ भावार्थ-‘‘ इसलिये हे भरतवंशी अर्जुन! तू हृदय में स्थित इस अज्ञानजनित अपने संशय को विवेकज्ञान रूपी तलवार द्वारा काटकर समत्वरूपी योग में स्थित हो जा एवं युद्ध के लिये खड़ा होजा।
  3. भरतवंशी शासकों द्वारा [[सरस्वती नदी | सरस्वती]], [[यमुना नदी | यमुना]] और [[गंगा नदी | गंगा]] के तट पर [[यज्ञ]] किए जाने के वर्णन से राज्य की भौगोलिक स्थिति का ज्ञान हो जाता है।
  4. अन्य फोटो नेशनल जियोग्राफिक प्रतियोगिता में भरतवंशी ने बाजी मारीभारतीय मूल के छात्र सात्विक कार्निक ने विषुवत रेखा से धरती पर सर्वाधिक दूरी पर स्थित जगह के रूप में इक्वाडोर की एक चोटी चिम्बोराजो का नाम सही-सही बताकर 2013 की नेशनल जियाग्राफिक प्रतियोगिता जीत ली।
  5. भावार्थ: हे कुंतीपुत्र! सुख-दुःख को देने वाले विषयों के क्षणिक संयोग तो केवल इन्द्रिय-बोध से उत्पन्न होने वाले सर्दी तथा गर्मी की ऋतुओं के समान आने-जाने वाले हैं, इसलिए हे भरतवंशी! तू अविचल भाव से उनको सहन करने का प्रयत्न कर।
  6. हम आपके आभारी है, कि आपके द्वारा हमें अनेक भरतवंशी राजाओं, देवताओं, दानवों, गंधर्वों, सर्पों, राक्षसों, दैत्यों, सिद्वों, यक्षों के अदभुत कर्मों तथा धर्म का पालन करने वाले अत्यन्त श्रेष्ठ जीवन और चरित्रों का वर्णन प्राप्त हुआ ।
  7. भावार्थ: हे भरतवंशी अर्जुन! तू मुझमें आदित्यों को अर्थात अदिति के द्वादश पुत्रों को, आठ वसुओं को, एकादश रुद्रों को, दोनों अश्विनीकुमारों को और उनचास मरुद्गणों को देख तथा और भी बहुत से पहले न देखे हुए आश्चर्यमय रूपों को देख॥ 6 ॥
  8. छित्वैनं संशयं योगमातिष्ठोत्तिष्ठ भारत ॥ भावार्थ: इसलिए हे भरतवंशी अर्जुन! तू हृदय में स्थित इस अज्ञानजनित अपने संशय का विवेकज्ञान रूप तलवार द्वारा छेदन करके समत्वरूप कर्मयोग में स्थित हो जा और युद्ध के लिए खड़ा हो जा॥ 42 ॥ ॐ तत्सदिति श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे ज्ञानकर्मसंन्यास योगो नाम चतुर्थोऽध्यायः ॥ 4 ॥
  9. महाभारत काल में भी लक्षागृह से बच कर निकले पांडवों ने वहां छुपकर कई वर्ष व्यतीत किये तथा जुए में शकुनि से पराजित होने के बाद 12 वर्ष का वनवास और तेरहवें वर्ष के अज्ञातवास का बड़ा हिस्सा पांडवों ने वहां व्यतीत किये, जो भरतवंशी धृतराष्ट्र जैसे शक्तिशाली राज्य की सीमा के बाहर था.
  10. बहून्यदृष्टपूर्वाणि पश्याश्चर्याणि भारत ॥ भावार्थ: हे भरतवंशी अर्जुन! तू मुझमें आदित्यों को अर्थात अदिति के द्वादश पुत्रों को, आठ वसुओं को, एकादश रुद्रों को, दोनों अश्विनीकुमारों को और उनचास मरुद्गणों को देख तथा और भी बहुत से पहले न देखे हुए आश्चर्यमय रूपों को देख॥ 6 ॥ इहैकस्थं जगत्कृत्स्नं पश्याद्य सचराचरम् ।
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के आस-पास के शब्द

  1. भरतपुरा
  2. भरतपुरा गाँव
  3. भरतबाला
  4. भरतमुनि
  5. भरतरा
  6. भरतवाक्य
  7. भरतसिंह सोलंकी
  8. भरता
  9. भरती
  10. भरती करना
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