भावप्रकाश वाक्य
उच्चारण: [ bhaaveprekaash ]
उदाहरण वाक्य
- · पानी पीने के पात्र के विषय में ' भावप्रकाश ' ग्रंथ में लिखा है कि पानी पीने के लिए ताँबा, स्फटिक या काँच-पात्र का उपयोग करना चाहिए।
- गीत का कविता से एक अलग ढाँचा होता है, जो ध्वनि से अपनी तथ्यपरक व्यंजनात्मकता के सहारे एक विशिष्ट आवर्त्त से मुखरित होकर भावप्रकाश करने में समर्थ होता है।
- हालांकि चरक संहिता, सुश्रुत संहिता और वाग्भट्ट ने सुबह पानी पीने का निर्देश नहीं दिया है, लेकिन भावप्रकाश सुबह उठने पर चुल्लु भर पानी पीने का उल्लेख जरूर है ।
- संस्कृत कथा साहित्य में विशेष रूप से कथासरित्सागर, गरुण पुराण, भविष्य पुराण, चरकसंहिता, सुश्रुत संहिता, भावप्रकाश आदि ग्रंथों में नाग संबंधी विविध विषयों का उल्लेख मिलता है।
- वाग्भट्ट, हारीत संहिता, शारंगधर संहिता, वासवराजर्याम, भैषज्य रत्नावली, अनुपान तरंगिणी तथा भावप्रकाश आदि ग्रंथो में इन ग्रहों से सम्बंधित प्रतिनिधि औषधियों-वनस्पतियों का विवरण एवं योग वर्णित है।
- इन ग्रंथों के अतिरिक्त वंगसेन, माधवनिदान, भावप्रकाश, भैषज रत्नावली, वैद्यविनोद, चक्रदत्त, शार, वैद्यजीवन आदि हैं, जो आयुर्वेद के क्षेत्र में सहयोग प्रदान करते हैं।
- आर्युवेदिक ग्रंथ भावप्रकाश के अनुसार सरसों के बीज उष्ण, तीखे और त्वचा रोगों को हरने वाले होते हैं तथा ये वात, पित्त और कफ जनित दोषों को शांत करते हैं।
- भावप्रकाश के अनुसार, गुड़ का अदरक के साथ सेवन कफ को छांटता है, हरड के साथ पित्त का नाश करता है और सौंठ के साथ सम्पूर्ण वातज रोगों में लाभकारी है।
- भावप्रकाश ग्रंथ में इसकी जानकारी मिलती है, इसकी रचना सन् 1550 के आसपास हुई और तभी पुर्तगाली भारत आ चुके थे, अतः ऐसा माना जाता है कि उनके साथ ही यह रोग भारत में आया।
- यह तो माता-पिता के विकृत सहवास का फल है. भावप्रकाश में लिखा है कि स्त्री ऊपर पुरूष नीचे ऐसे सहवास से उत्पन्न सन्तानपुरुष होने पर स्त्रियों जैसा तथा स्त्री होने से पुरुष जैसा आचरण करती हैं.