भोजदेव वाक्य
उच्चारण: [ bhojedev ]
उदाहरण वाक्य
- नताल चीन्ह ग बाम्हन देवता (जाति की बेटी नहीं हूँ मैं हे विप्र देवता, किन्तु करम की बेटी मैं हूं बेटी राजा भोजदेव की और भतीजी का रिश्ता है आपसे मेरा इस पावन रिश्ते को पहचान लीजिये।)
- वृष्णि-वीर कृष्ण-बलराम, चण्डप्रद्योत, वत्सराज उदयन, मौर्य राज्यपाल अशोक सम्राट् सम्प्रति, राजा विक्रमादित्य, महाक्षत्रप चष्टन व रुद्रदामन, परमार नरेश वाक्पति मुंजराज, भोजदेव व उदयादित्य, आमेर नरेश सवाई जयसिंह, महादजी शिन्दे जैसे महान् शासकों का राजनैतिक संस्पर्श इस नगरी को प्राप्त हुआ है।
- 3. दुर्गाशंकर प्रसाद सिंह अपने ग्रंथ ष्भोजपुरी के कवि और काव्यष् में लिखते हैं कि दोनों भोजपुर (वर्तमान नया भोजपुर तथा पुराना भोजपुर) गाँवों को डुमराँव राजवंश के दो परमार राजाओं ने बसाया था, जिनमें प्रथम धार नरेश राजा भोजदेव (1005-1055 ई 0) थे।
- भाग-1 से आगे......देवराज की चौथी पीढ़ी पर भोजदेव ने शहाबुद्दीन गोरी की फ़ौज का सामना किया उर होनहार ने लुद्र्वा की रौनक सदा के लिए छीन ली | पर जैसल ने भोजदेव के उत्तराधिकारी के रूप में मुझ जैसलमेर दुर्ग को बसाया | संवत १२१२ से आज तक लगभग ८०० वर्षों में
- भाग-1 से आगे......देवराज की चौथी पीढ़ी पर भोजदेव ने शहाबुद्दीन गोरी की फ़ौज का सामना किया उर होनहार ने लुद्र्वा की रौनक सदा के लिए छीन ली | पर जैसल ने भोजदेव के उत्तराधिकारी के रूप में मुझ जैसलमेर दुर्ग को बसाया | संवत १२१२ से आज तक लगभग ८०० वर्षों में
- भाग-1 से आगे......देवराज की चौथी पीढ़ी पर भोजदेव ने शहाबुद्दीन गोरी की फ़ौज का सामना किया उर होनहार ने लुद्र्वा की रौनक सदा के लिए छीन ली | पर जैसल ने भोजदेव के उत्तराधिकारी के रूप में मुझ जैसलमेर दुर्ग को बसाया | संवत १२१२ से आज तक लगभग ८०० वर्षों में...
- भाग-1 से आगे......देवराज की चौथी पीढ़ी पर भोजदेव ने शहाबुद्दीन गोरी की फ़ौज का सामना किया उर होनहार ने लुद्र्वा की रौनक सदा के लिए छीन ली | पर जैसल ने भोजदेव के उत्तराधिकारी के रूप में मुझ जैसलमेर दुर्ग को बसाया | संवत १२१२ से आज तक लगभग ८०० वर्षों में...
- यद्यपि आनंदवर्धन द्वारा ध्वनिसिद्धांत की स्थापना हो चुकी थी तथापि उस समय तक काव्यात्मा के रूप में ध्वनि की मान्यता विवादग्रस्त सी ही थी ; अतएव साक्षात् रूप से ध्वनि को काव्य की परिभाषा में आत्मा के रूप में स्थान देने की दृढ़ता न भोजदेव ने ही अपनाई और न भट्ट मम्मट ने ही।
- जल, वायु और अग्नि के संयोग से उत्पन्न वाष्प (भाप) के निरोध (रोकने) से अनेक क्रियाओं का सम्पादन करना ' कला ' है-[3] भोजदेव (वि 0 सं 0 1066-98) कृत ' समरांगण सूत्रधार ' के 31 वें अध्याय का नाम ही ' यन्त्रविधान ' है।
- घर बनाना शुरू करने से पहले वास् तुशास्त्र के अनुसार नियमों का पालन करना चाहिए, ' समरांगण सूत्रधार वास् तुशास् त्र ' में महाराजा भोजदेव ने लिखा है कि शुद्रों के लिए 3 तल वाला भ् ावन कल् याणकारी होता है, इस से बढ कर यदि शुद्र का भवन होगा तो उस के कुल का नाश हो जाएगा ' सार्ध त्रिभूमिशूद्राणां वेश् म कुर्याद् विभूतये, अतोधिकतरं यत् स् यात् तत् करोति कुलक्षयम ' (' समरांगण सूत्र 35 / 21)