मनमोहन कृष्ण वाक्य
उच्चारण: [ menmohen kerisen ]
उदाहरण वाक्य
- फिल्म मे अमिताभ के अतिरिक्त संजीव कुमार, शशि कपूर, वहीदा रहमान, हेमा मालिनी, राखी गुलजार, प्रेम चोपड़ा, पूनम ढिल्लों, मनमोहन कृष्ण, सचिन, इफ्तेखार, यूनुस परवेज, गीता सिद्धार्थ आदि कलाकारों ने भी काम किया है....
- बी. आर. चोपड़ा की ही ‘ नया दौर ' में ‘ जुम्मन चाचा ' बने मनमोहन कृष्ण को अपनी दर्दभरी आवाज़ में बाकी मज़दूरों को ये एक छोटा सा संवाद बोलते देखो, “ जितनी ज़ोर की हँसी, उतनी ही ज़ोर का तमाचा...
- यहीं वे उन लीला चिटणीस के हीरो भी बने, जिनकी फ़िल्मों को देखने उन दिनों के युवा सिनेमागृहों में भीड़ जमाते थे! शान्तारामजी की उस फ़िल्म का नाम था ‘ अंधों की दुनिया ' और उस में मनमोहन कृष्ण जी ने अपनी आवाज़ में गाने भी गाये थे।
- शान्ताराम जैसे कलागुरु के हाथ नीचे शुरू करने वाले मनमोहन कृष्ण जी १ ९९ ० की ३ ० अक्तूबर के दिन शान्तारामजी के देहांत के तीन-चार दिन बाद ही, जैसे अपने गुरु को मिलने चले हों, ऐसे ३ नवंबर, १ ९९ ० के रोज़ हम सब के बीच से विदा हो गए।
- समाज में रसूखदार लोग किस तरह अपने पद का दुरूपयोग करके निजी दुश्मनी के लिए एक पूरे परिवार को बर्बाद करता है इसकी जीती जागती मिसाल इस खबर के माध्यम से ‘ जनोक्ति. कॉम ‘ आपके सामने रख रहा है | खबर को पढ़िए और अपनी प्रतिक्रिया से न्याय की उम्मीद में जिन्दा ‘ मनमोहन कृष्ण मीणा ‘ को नैतिक समर्थन दीजिए | (अन्याय और शोषण की यह दास्ताँ किस्तवार जारी ….) जनोक्ति डेस्क
- इस गाने में थियेटर तालियों से तब गूँज उठता था, जब मनमोहन कृष्ण जी इन पंक्तियों को गाते थे.... “ ये दीन (धर्म) के ताजर (व्यापारी) ये वतन बेचने वाले, इन्सानों की लाशों के कफ़न बेचने वाले, ये महलों में बैठे हुए कातिल ये लूटेरे, काँटों के एवज (बदले में) रुहे चमन बेचने वाले, तू इनके लिए मौत का सामान बनेगा, इन्सान की औलाद है इन्सान बनेगा..