मुक्तिवाहिनी वाक्य
उच्चारण: [ muketivaahini ]
उदाहरण वाक्य
- दरअसल लेखिका ने मुक्ति संग्राम के दिनों में पाकिस्तानी सैनिकों तथा उर्दूभाषी नागरिकों द्वारा बांग्लाभाषियों पर किए गए अत्याचारों तथा मुक्तिवाहिनी के कार्यों के बहुत प्रामाणिक विवरण देने के लोभ में उपन्यास को बिखरा सा दिया है।
- दरअसल लेखिका ने मुक्ति संग्राम के दिनों में पाकिस्तानी सैनिकों तथा उर्दूभाषी नागरिकों द्वारा बांग्लाभाषियों पर किए गए अत्याचारों तथा मुक्तिवाहिनी के कार्यों के बहुत प्रामाणिक विवरण देने के लोभ में उपन्यास को बिखरा सा दिया है।
- दरअसल लेखिका ने मुक्ति संग्राम के दिनों में पाकिस्तानी सैनिकों तथा उर्दूभाषी नागरिकों द्वारा बांग्लाभाषियों पर किए गए अत्याचारों तथा मुक्तिवाहिनी के कार्यों के बहुत प्रामाणिक विवरण देने के लोभ में उपन्यास को बिखरा सा दिया है।
- उन्होंने मुझसे बातचीत के दौरान कई बार स्वीकार किया कि हां, मुक्तिवाहिनी ने ढेर सारे निर्दोष लोगों की जान ली लेकिन पाकिस्तानी सेना ने जो कुछ किया ऐसा कार्य किसी भी मुल्क की राष्ट्रीय सेना नहीं करती।
- अगर आप मुक्तिवाहिनी की उत्पत्ति के कारणों, उनके लड़ने के तरीकों और उस कालखंड में पाक सेना द्वारा की गई बर्बरता और भारत द्वारा किए गए परोक्ष और प्रत्यक्ष सहयोग के बारे में विस्तार से जानने में रुचि रखते हों तो ये उपन्यास आपके लिए है।
- उपन्यास में उस दौरान हुईं लूट, हत्या, बलात्कार एवं आगज़नी की घटनाओं, मानवीय आधार पर भारतीय सेना द्वारा पहुंचाई गई मदद, मुक्तिवाहिनी को प्रशिक्षण देने के लिए भारतीय सीमा क्षेत्र में बनाए गए प्रशिक्षण शिविरों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत सरकार की भूमिका का ज़िक्र किया गया है.
- अब आगे संगठन का नाम होगा ‘ भोजशाला मुक्तिवाहिनी ' | राष्ट्रद्रोहियोंके साथ कोई आर्थिक संबंध नहीं रखा जाए | तब ये राष्ट्रद्रोही आपके चरणों में लेट जायंगे | अब्दुल कलाम जी ने हमको जो अटॉम बम बना कर दिया वो क्या दिखने की चीज है उसका इस्तमाल होना चाहिए जिससे की ये बार बार की परेशानी ख़तम हो जाये | ''
- चाहे बंगलादेश के स्वत्रतासंग्राम का वर्णन हो (पैदल और किन किन कठिन परिस्थितियों में उन्होंने बंगलादेश की यात्रा की और मुक्तिवाहिनी के लोगों से सम्पर्क किया, यह तो शायद पूरी तरह दिनेशदास गुप्त ही जानते हैं), चाहे महाराष्ट्र के किसी आकाल क्षेत्र का, चाहे श्रीवस्ती की प्रचीन बस्ती के नजदीक से गुजरने का प्रसंग हो, उनकी दृष्टि हमेशा समान्य आदमी की जिन्दगी को टटलोती रहती थी.
- चाहे बंगलादेश के स्वत्रंता संग्राम का वर्णन हो (पैदल और किन किन कठिन परिस्थितियों में उन्होंने बंगलादेश की यात्रा की और मुक्तिवाहिनी के लोगों से सम्पर्क किया, यह तो शायद पूरी तरह दिनेशदास गुप्त ही जानते हैं), चाहे महाराष्ट्र के किसी आकाल क्षेत्र का, चाहे श्रीवस्ती की प्राचीन बस्ती के नजदीक से गुजरने का प्रसंग हो, उनकी दृष्टि हमेशा सामान्य आदमी की जिन्दगी को टटलोती रहती थी.
- वैसे, अगर 41-42 में किसी प्रकार नेताजी को जापान ले आया जाता, तो जापानी सेना नेताजी को सामने रखकर भारत में प्रवेश कर सकती थी (नेताजी के साथ नाम के लिए ही सही, युद्धबन्दी भारतीय सैनिकों की एक मुक्तिवाहिनी होती), इससे भारतीयों के मन में जापानियों के प्रति दुर्भावना पैदा नहीं होती, भारत अंग्रेजों के चंगुल से मुक्त हो जाता और सबसे बड़ी बात-देश को नेताजी के रुप में पहला शासक मिलता।