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मृच्छकटिकम् वाक्य

उच्चारण: [ merichechhektikem ]

उदाहरण वाक्य

  1. अभिजात लोगों के इस मत पर मुझे संस्कृत नाट्यकृति ‘ मृच्छकटिकम् ' की यह उक्ति याद आती है “ पापं कर्म च यत्परैरपि कृतं तत्तस्य संभाव्यते ।
  2. अमली, बटोही और धरती आबा आपके मौलिक नाटक और शूद्रक रचित मृच्छकटिकम् की पुनर्रचना माटीगाड़ी और फणीश्वरनाथ रेणु के उपन्यास का नाट्यांतर मैला आँचल प्रकाशित हैं।।
  3. मृच्छकटिकम् नाटक में एक प्रसंग है जिसमें विदूषक मैत्रेय रंगमंच पर चिंतित मुद्रा में बैठे चारुदत्त के पास पहुंचता है और उससे चिंता का कारण पूछता है ।
  4. पाश्चात्य आलोचकों ने इसकी बड़ी सराहना की है तथा मृच्छकटिकम् को सार्वभौम आकर्षण का नाटक बताया है, जिसका सफल मंचन विश्व में कहीं भी किया जा सकता है।
  5. मैं कह नहीं सकता कि इस उक्ति का मूल स्रोत क्या है, लेकिन मुझे इसके दर्शन नाट्यकार शूद्रक द्वारा रचित संस्कृत नाट्यकृति मृच्छकटिकम् के अधोलिखित श्लोक में मिले:
  6. मृच्छकटिकम् की पुनर्रचना “ माटीगाड़ी ” और फणीश्वरनाथ रेणु के उपन्यास का नाट्यांतर मैला आँचल लिखने वाले रचनाकार से बस्तर की कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं के नाट्यरूपांतरण का अनुरोध तो कर ही सकता हूँ।
  7. वे मृच्छकटिकम् या इसी तरह की कुछ दूसरी प्राचीन सामग्री से दो-चार शब्दों को जरूर उठाते हैं, पर उससे कितनी बात बनेगी? कुल मिलाकर उनके तर्क ही प्रबल हैं, भाषाई तथ्य दुर्बल।
  8. अमली, बटोली और धरती आबा मौलिक नाटक, माटी गाड़ी (मृच्छकटिकम् की पुनर्रचना) और मैला आंचल (रेणु के उपन्यास का नाट्यांतर) तथा तीन रंग नाटक शीर्षक नाट्य संकलन प्रकाशित हुआ है.
  9. मृच्छकटिकम् ' संस्कृत साहित्य की एक चर्चित नाट्य-रचना है, जिसके बारे में मैं पहले अन्यत्र लिख चुका हूं (देखें दिनांक 26-9-2010 एवं 11-2-2009 की प्रविष्ठियां) ।
  10. शूद्रक के मृच्छकटिकम् में नायक राजा न होकर निर्धन व्यक्ति चारुदत्त है और उस नाटक में राजा आर्यक का चरित्र अत्यन्त लचर है अतः ऐसा प्रतीत होता है कि शूद्रक के मृच्छकटिकम के समय तक रंगमंच जन-साधारण में पहुँच चुका था।
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