राधेश्याम कथावाचक वाक्य
उच्चारण: [ raadhesheyaam kethaavaachek ]
उदाहरण वाक्य
- भजनों नाटकों और एकांकियों के जरिये देशभर में आध्यात्मिक जागरण की अलख जगाने वाले पं राधेश्याम कथावाचक का भले ही आज उतना नाम ना लिया जाता हो लेकिन उन्हें जानने वाले इस बात से अच्छी तरह वाकिफ हैं कि उन्होंने रामकथा को एक ऐसी शैली में पेश किया कि वो गांव के चौपाल से निकल कर रामलीला और रंगमंच से होते हुए जन-जन के मन में समा गई।
- इस तरह की कोशिशें हिन्दी की तरफ़ से कई पीढ़ियाँ कम-से-कम सौ साल से करती आ रही थीं: चाहे वह छापे की दुनिया के भारतेन्दु और उनके बाद के दिग्गज रहे हों, जो कविता में हिन्दी को ब्रजभाषा-अवधी वग़ैरह के बरक्स 'खड़ी' करने में, या पारसी नाटक-लेखन के क्षेत्र में पं. राधेश्याम कथावाचक के सचेत प्रयास हों, या फिर रेडियो की दुनिया में पं. बलभद्र नारायण दीक्षित 'पढ़ीस' के परामर्श हों या पं.
- इस तरह की कोशिशें हिन्दी की तरफ़ से कई पीढ़ियाँ कम-से-कम सौ साल से करती आ रही थीं: चाहे वह छापे की दुनिया के भारतेन्दु और उनके बाद के दिग्गज रहे हों, जो कविता में हिन्दी को ब्रजभाषा-अवधी वग़ैरह के बरक्स ‘खड़ी‘ करने में, या पारसी नाटक-लेखन के क्षेत्र में पं. राधेश्याम कथावाचक के सचेत प्रयास हों, या फिर रेडियो की दुनिया में पं. बलभद्र नारायण दीक्षित ‘पढ़ीस‘ के परामर्श हों या पं.
- इस तरह की कोशिशें हिन्दी की तरफ़ से कई पीढ़ियाँ कम-से-कम सौ साल से करती आ रही थीं: चाहे वह छापे की दुनिया के भारतेन्दु और उनके बाद के दिग्गज रहे हों, जो कविता में हिन्दी को ब्रजभाषा-अवधी वग़ैरह के बरक्स ‘खड़ी' करने में, या पारसी नाटक-लेखन के क्षेत्र में पं. राधेश्याम कथावाचक के सचेत प्रयास हों, या फिर रेडियो की दुनिया में पं. बलभद्र नारायण दीक्षित ‘पढ़ीस' के परामर्श हों या पं.
- इस तरह की कोशिशें हिन्दी की तरफ़ से कई पीढ़ियाँ कम-से-कम सौ साल से करती आ रही थीं: चाहे वह छापे की दुनिया के भारतेन्दु और उनके बाद के दिग्गज रहे हों, जो कविता में हिन्दी को ब्रजभाषा-अवधी वग़ैरह के बरक्स ‘ खड़ी ' करने में, या पारसी नाटक-लेखन के क्षेत्र में पं. राधेश्याम कथावाचक के सचेत प्रयास हों, या फिर रेडियो की दुनिया में पं. बलभद्र नारायण दीक्षित ‘ पढ़ीस ' के परामर्श हों या पं.
- एक युग था जब छपरा की पतुरिया गुलाबो, मुजफ्फरपुर की ढेला बाई, मीरगंज (गोपालगंज) की बहनें मुनिया बाई, दुनिया बाई, बरेली के पंड़ित राधेश्याम कथावाचक, मुरादाबाद के मास्टर फिदा हुसैन नरसी, बनारस के शंकर डांसर, मुकुंदी भांड़, छपरा के महेन्दर मिसिर, सीवान के रसूल हजाम और दरबारी गिरि, फकुली (छपरा) के बसुनायक सिंह, बक्सर के पं 0 द्विजराम पाठक, सोहरा (छपरा) के चांदी सिंह 26 ने लोक संस्कृति के लिए अपना सब कुछ लुटा दिया ।