लौह भस्म वाक्य
उच्चारण: [ lauh bhesm ]
उदाहरण वाक्य
- मूलतः लौह भस्म पित्त और वात दोष, रक्त, मांस, समस्त धातुओं, द्रव्यों, हृदय, यकृत, पाचन संस्थान आदि में विशेष रूप से लाभ पहुंचाती है।
- 2. त्रिफला: त्रिफला के 2 से 6 ग्राम चूर्ण में लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग लौह भस्म मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से बालों का झड़ना बन्द हो जाता है।
- पाचन शक्ति की निर्बलता या सर्वत्रा धातु परिपोषण क्रम की अशक्ति के कारण शरीर में सेन्द्रिय विष का संचय होता है जो लौह भस्म के सेवन से नष्ट हो जाता है।
- (5) शुद्ध शिलाजीत 25 ग्राम, लौह भस्म 1 ग्राम, केसर 2 ग्राम, अंबर 2 ग्राम, सबको मिलाकर खरल में खूब घुटाई कर महीन कर लें और 1-1 रत्ती की गोलियां बना लें।
- लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग लौह भस्म के साथ 1-2 आंवले का सेवन करने से कामला, पांडु और खून की कमी आदि रोगों में अत्यंत लाभ होता है।
- इस रोग में यदि त्वचा पर व्रण लाल या काला हो उसमें छोटी-छोटी फुंसियां हों, खाज तथा दाह आदि लक्षण हो तब लौह भस्म और त्रिफला चूर्ण का प्रयोग लाभप्रद है।
- 2. त्रिफला: त्रिफला के 2 से 6 ग्राम चूर्ण में लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग लौह भस्म मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से बालों का झड़ना बन्द हो जाता है।
- अयः समानं न हि किंचिदस्ति रसायन श्रेष्ठ तम् नराणाम् ॥ अर्थात् लौह भस्म आयुवर्द्धक, बल और वीर्य को बढ़ाने वाली, रोगों का नाश करने वाली और कामोत्तेजक गुण वाली है।
- यकृत विकार: शुद्ध शिलाजीत और लौह भस्म 2-2 रत्ती तथा त्रिफला चूर्ण आधा चम्मच, तीनों मिलाकर सुबह और रात को सोने से पहले आधा कप गोमूत्र के साथ लेने से यकृत विकार दूर होता है।
- लौह भस्म के प्रमुख योग उपलब्ध हैं जोकि निम्न हैं-आरोग्यवर्धिनी वटी, ताप्यादिलौह, नवायस लौह, लौह पर्पटी, कफकुठार रस, योगराज गुग्गल, प्रदारान्तक लौह, चन्द्रप्रभावटी, लोहासन, विडंगादि लौह आदि।