वायु देव वाक्य
उच्चारण: [ vaayu dev ]
उदाहरण वाक्य
- राम राम ताऊ पहेली का उत्तर: यह जगह है “पांडव गुफाएं” गोवा में रामप्यारी के बोनस सवाल का उत्तर: युधिष्ठिर-कुंती + धर्मं देव भीम-कुंती + वायु देव अर्जुन-कुंती + इन्द्र देव नकुल और सहदेव-माद्री + दोनों जुड़वाँ अश्विन बंधु (दोनों भाइयों से एक एक पुत्र)
- बहुसंख्यक हिन्दुओं को देवी-देवता और वास्तविक इश्वर में कोई अंतर नहीं नजर आता | अब कितने लोगों को ये पता है की हमारे ३३ करोड़ देवी-देवता प्रशासनिक अधिकारी की तरह हैं जिनका काम प्रकृति में संतुलन बनाये रखना है, जैसे की वायु देव वायु के, वरुण जल के देवता हैं | वास्तव में सारे देवी-देवताओं एक इश्वर द्वारा ही निर्देशित होते हैं |
- बहुसंख्यक हिन्दुओं को देवी-देवता और वास्तविक इश्वर में कोई अंतर नहीं नजर आता | अब कितने लोगों को ये पता है की हमारे ३३ करोड़ देवी-देवता प्रशासनिक अधिकारी की तरह हैं जिनका काम प्रकृति में संतुलन बनाये रखना है, जैसे की वायु देव वायु के, वरुण जल के देवता हैं | वास्तव में सारे देवी-देवताओं एक इश्वर द्वारा ही निर्देशित होते हैं |
- वास्तुशास्त्र में वायव्य दिशा वायव्य दिशा उत्तर पश्चिम के मध्य को कहा जाता है. वायु देव इस दिशा के स्वामी हैं.वास्तु की दृष्टि से यह दिशा दोष मुक्त होने पर व्यक्ति के सम्बन्धों में प्रगाढ़ता आती है.लोगों से सहयोग एवं प्रेम और आदर सम्मान प्राप्त होता है.इसके विपरीत वास्तु दोष होने पर मान सम्मान में कमी आती है.लोगो से अच्छे सम्बन्ध नहीं रहते और अदालती मामलों में भी उलझना पड़ता है.
- उसी समय अय्जना भी वायु देव से आशीर्वाद और खीर ले कर के घर को लौट थी | जब केशरी और अय्जना ने एक दुसरे को देखा तो खुसी से उझल पड़े | उनके मिलन से शिव का तेज अय्जना ने प्रविष्ट हो गया | चैत्र शुक्ल १५ मंगलवार को हनुमान जी अवतरण हुआ |उनमे रूद्र का तेज और वायु की शक्तिया समाहित थी |हनुमान जी वायु के औरस पुत्र और रूद्र के अवतार कहलाते है |
- अब अगले है देवता, साईं न वायु देव है, न अग्नि देव, न पवन दे, प्राचीन काल में इन्द्र की पूजा होती थी और यज्ञ का एक भाग इन्द्र को मिलता था, अब इन्द्र पूजा भी बंद हो गयी है, सिर्फ दक्षिण भारत या उड़ीसा के कुछ भागो में इन्द्र पूजा होती है, किसी भी देवता में साईं का नाम नहीं आता तो इस कारण साईं को गर्भ गृह में नहीं बिठाया जा सकता,
- मेरे साथ सम्बन्ध हो जाने से तुम लोग अक्षय यौवन प्राप्त करके अमर हो जाओगी!] वायु देव के इस प्रस्ताव को सुनकर पतिर-भक्त कुशनाभ कन्याओं का यह प्रतिउत्तर भारतीय संस्कृति में पुत्रियों को दिए गए संस्कारों को प्रदर्शित करते हैं-यथा-'' माँ भूत स कालो..... नो भर्ता भविष्यति '' [21-22 श्लोक उपरोक्त] [दुर्मते! वह समय कभी न आवे जब कि हम अपने सत्यवादी पिता की अवहेलना करके कामवश या अत्यंत अधर्मपूर्वक स्वयं ही वर ढूँढने लगें.