विनयपत्रिका वाक्य
उच्चारण: [ vineypetrikaa ]
उदाहरण वाक्य
- सूर के विनय के पदों में तथा तुलसी की ‘ विनयपत्रिका ' में इसकी पूर्ण अभिव्यक्ति हुई है।
- इसके अलावा तुलसी की अन्य रचनाओं विनयपत्रिका, कवितावली, दोहावली आदि में उनकी विचारधारा अधिक स्पष्टता से प्रस्तुत होती है।
- ' रामचरितमानस ‘ और ' विनयपत्रिका ` के समय छात्र और अध्यापक दोनो की सहभागिता देखते ही बनती थी।
- णिक, (7) सर्वसंग्रह, (8) कबीर बीजक की टीका, (9) विनयपत्रिका की टीका, (10) रामचंद्र की सवारी, (11) भजन, (12)
- विनयपत्रिका, बरवै रामायण, कवितावली, हनुमान बाहुक और दोहावली इसी श्रेणी की कृतियां मानी जा सकती हैं।
- ” वहीं विनयपत्रिका में तुलसी की अवधी में भी चरचा है-“ जपहि नाम रघुनाथ को चरचा दूसरी न चालु।
- ‘ विनयपत्रिका ' का प्रसिद्ध पद ‘ केशव कहि न जाय का कहिये........ ' अद्भुत रस का उत्कृष्ट उदाहरण है।
- महाकवि तुलसीदास ने भी राम कथा का चित्रण रामचरितमानस, विनयपत्रिका, दोहावली व कवितावली में विभिन्न रूपों में किया है।
- तुलसीदास के रामचरित मानस में, गीतावली में, कवितावली में, विनयपत्रिका में कहीं तत्कालीन बादशाह का नाम तक नहीं है।
- अवधी और ब्रजभाषा में तथा विभिन्न कवित्व शैलियों में उन्होंने दोहावली कवितावली, बरवै रामायण, रामलला नहछू, तथा विनयपत्रिका के पदों की रचना की।