शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय वाक्य
उच्चारण: [ shertechender chettopaadheyaay ]
उदाहरण वाक्य
- ============================== ========================= ' देवदास '-मूलरूप से बांग्ला में लिखित शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास को आधार बनाकर हिंदी में प्रमथेश बरुआ (1936), विमल राय (1955) और बाद में संजय लीला भंसाली (2002) द्वारा फ़िल्म का निर्माण हुआ!
- jpg | thumb | right | बांग्ला उपन्यासकार शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय]] [[शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय]] ([[१ ५ सितंबर]], [[१ ८ ७ ६]]-[[१ ६ जनवरी]], [[१ ९ ३ ८]]) [[बांग्ला]] के सुप्रसिद्ध [[उपन्यास | उपन्यासकार]] थे।
- jpg | thumb | right | बांग्ला उपन्यासकार शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय]] [[शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय]] ([[१ ५ सितंबर]], [[१ ८ ७ ६]]-[[१ ६ जनवरी]], [[१ ९ ३ ८]]) [[बांग्ला]] के सुप्रसिद्ध [[उपन्यास | उपन्यासकार]] थे।
- ने जहां हिन्दी काव्यजगत को एक से बढ़कर एक अनुपम रचनाएं दी वहीं अंग्रेजों के शासनकाल में भारतेन्दु हरिशचन्द्र, बालकृष्णभट्ट, रवीन्द्रनाथ ठाकुर, माइकल मधुसूदन दत्त, बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय, दीनबन्धु मित्र, देवेन्द्रनाथ ठाकुर, हेमचन्द्र बनर्जी, शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय काज़ी नजरूल इस्लाम, जयशंकर प्रसाद, प्रेमचन्द, चन्द्रधर शर्मा गुलेरी, महावीर प्रसाद द्विवेदी और देवकीनन्दन खत्री जैसे महान साहित्यकारों ने भारतीय साहित्य को एक पराकाष्ठा प्रदान की।
- कि “ देवदास ” उपन्यास के लेखक शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय ने फिल्म देख कर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था-” फिल्म देखने के बाद मुझे ऐसा लग रहा है कि इस उपन्यास को लिखने के लिए ही मेरा जन्म हुआ है और इसे सिनेमा के परदे पर मूर्त रूप देने के लिए ही आपका (पी. सी. बरुआ) का जन्म हुआ है |