शैलेन्द्र सागर वाक्य
उच्चारण: [ shailenedr saagar ]
उदाहरण वाक्य
- कार्यक्रम को मुद्राराक्षस, शैलेन्द्र सागर, वीरेन्द्र यादव, राकेष, शकील सिद्दीकी, शहंषाह आलम, डॉ. सुभाष राय, डॉ. सुधाकर अदीब, विनय दास आदि वरिष्ठ साहित्यकारों ने भी सम्बोधित किया।
- चतुरंग ' 'चलो दोस्त सब ठीक है' जैसे उपन्यासों और 'इस जुनून में' 'मकान ढह रहा है' 'माटी' 'आमीन' सरीखे कहानी संग्रहों के बाद शैलेन्द्र सागर का नया संग्रह 'प्रतिरोध' ;२००८द्ध एक सार्थक रचना यात्राा का नया मोड़ है।
- -सीमा स्वधा ब्लॉग लेखन: हिंदी का अहित करने वाला अश्लील रचनाकर्म नही..एक गंभीर रचनाकर्म..शैलेन्द्र सागर का कबूलनामा जब कथाक्रम पत्रिका पढने के बाद मैंने संपादक शैलेन्द्र सागर के सम्पादकीय पर बहस छेड़ी थी तो काफी प्रतिक्रियाएं मिली।
- ख्यात कथाकार शैलेन्द्र सागर तथा संदीप मील की रचनाएं वर्तमान शताब्दी में हिंदी कथा साहित्य में नया प्रयोग है जिसमें कथा की सरसता के साथ साथ आलेखों के समान बात को बिना लाग लपेट के कहने का नया तरीका है।
- इतने किलोमीटर कागद कारे किए भला किसके लिए रिटायर्ड आईपीएस शैलेन्द्र सागर और उनके कथाकार मित्रों को सराहा जाना चाहिए कि अठारह साल पहले उनके द्वारा शुरू किया गया साहित्यिक आयोजन कथाक्रम लखनऊ की तहजीब का हिस्सा बन चुका है।
- पर मुझे लगा कि यह पोस्ट (पूर्व में इस बहस में शामिल नही होने वाले ब्लोगर्स नीचे के पोस्ट में जाकर पढ़े) शैलेन्द्र सागर को भी पढना चाहिए...मैंने उन्हें वाया मेल उस पोस्ट का लिंक उनके रिसाले में पहुंचा दिया..
- इस श्रेणी की अन्य लघुकथाएं हैं अहमद निसार: पद चिह्न, भगीरथ: शिक्षा, बलराम अग्रवाल: जहर की जड़े, यादवेन्द्र शर्मा चन्द्र: जिज्ञासा, शैलेन्द्र सागर: हिदायत ।बच्चे और परिवार बच्चे अपना अधिकांश समय घर और स्कूल में बिताते हैं।
- इसी सत्र में श्री शैलेन्द्र सागर के कहानी संग्रह “ मकान ढह रहा है ” का श्री राजेन्द्र यादव द्वारा विमोचन भी किया गया, क्योंकि यह कहानी संग्रह किसी को उपलब्ध नहीं था, इसलिये उस पर बात नहीं हो सकी ।
- हंस ने छब्बीसवें साल में कदम रखते हुए जो पहला अंक निकाला है उसमें हंस और साहित्यिक पत्रिकाओं पर अशोक वाजपेयी, रवीन्द्र कालिया, जनसत्ता के कार्यकारी संपादक ओम थानवी, पंकज बिष्ट, अखिलेश और शैलेन्द्र सागर के लेख छपे हैं ।
- जनपद लखनऊ से प्रकाशित होने वाली कथा साहित्य की प्रमुख पत्रिका ‘ कथाक्रम ' के संपादक कथाकार श्रीयुत शैलेन्द्र सागर जी का कहना है कि श्रीलाल शुक्ल जी पत्रिका कथाक्रम के संरक्षक भी हैं और संरक्षक का सम्मानित होना निःसंदेह ही उल्लास का विषय है।