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श्रमण संस्कृति वाक्य

उच्चारण: [ shermen sensekriti ]

उदाहरण वाक्य

  1. श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर राजस्थान एवं महाकवि आचार्य ज्ञानसागर छात्रावास की स्थापना आपकी प्रेरणा से हुई, जिसमें प्रतिवर्ष 100 श्रमण संस्कृति समर्थक विद्वान तैयार हो कर भार वर्ष में जिनवानी का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं अर्थात सांगानेर को तो विद्वान तैआर करने की खान बना दिया है।
  2. श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर राजस्थान एवं महाकवि आचार्य ज्ञानसागर छात्रावास की स्थापना आपकी प्रेरणा से हुई, जिसमें प्रतिवर्ष 100 श्रमण संस्कृति समर्थक विद्वान तैयार हो कर भार वर्ष में जिनवानी का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं अर्थात सांगानेर को तो विद्वान तैआर करने की खान बना दिया है।
  3. श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर राजस्थान एवं महाकवि आचार्य ज्ञानसागर छात्रावास की स्थापना आपकी प्रेरणा से हुई, जिसमें प्रतिवर्ष 100 श्रमण संस्कृति समर्थक विद्वान तैयार हो कर भार वर्ष में जिनवानी का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं अर्थात सांगानेर को तो विद्वान तैआर करने की खान बना दिया है।
  4. अशोकनगर (मध्य प्रदेश) की त्रिकाल चौबीसी, ज्ञानोदय तीर्थक्षेत्र (राजस्थान) सुदर्शनोदय तीर्थ क्षेत्र आँवा (राजस्थान) श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर (राजस्थान) सुधासागर इंटर कॉलेज, ललितपुर (उत्तर प्रदेश) आ. ज्ञानसागर वागर्थ विमर्श केन्द्र, ब्यावर (राजस्थान) अनेक गौशालाऐं आदि नवीन क्षेत्र आपकी सातिशय प्रेरणा से स्थापित होकर जैन संस्कृति का गौरव बढा रहे हैं।
  5. व्यवसाय व जाति सभी संत कवियों की भांति दादू भी श्रमण संस्कृति के पोषक नहीं है, वे केवल खंजूरी, तंबूरा अथवा झोली लेकर न तो केवल कहानी व उपाख्यान ही कहते थे और न केवल भक्तों और अनुयायियों की भक्ति भावना और गुरू श्रद्वा के ही भरोसे बैठकर गुलछर्रा ही उड़ाते थे।
  6. श्रमण संस्कृति अर्थात श्रम पर आधारित जीवन यापन करने वाले भारत देश के सभी मूलनिवासी भाइयों को श्रम दिवस पर हार्दिक बधाई तथा उनकी एकता भाईचारा तथा बौधिक एवं आर्थिक समृद्धि की निष्पक्ष कामना तथा आश्रम संस्कृत पर आधारित अर्थात बिना काम किये, लोगों को मुर्ख बनाकर अपना पेट भरनेवाले परधन भोगियों को धिक्कार ।
  7. साधु / साध्वी का नाम, गुरु, कुल संख्या, चातुर्मास स्थल का पिनकोड सहित संपर्क सूत्र फोन व मोबाइल सहित प्रेषित करे जिससे उसे आगामी चातुर्मास विशेषांक में प्रकाशित किया जा सके!! * आगामी प्रकाशन:-श्रमण संस्कृति-साधु परिचय यदि किसी दिगम्बर जैन साधु का परिचय इस प्रकाशन मे प्रेषित नहीं हुआ है तो क्रप्या फॉर्म डाऊनलोड कर संस्कार कार्यालय भेजने का कष्ट करे!!
  8. अशोकनगर (मध्यप्रदेश) की त्रिकाल चौबीसी, ज्ञानोदय तीर्थ क्षेत्र (राजस्थान) सुदर्शनोदय तीर्थ क्षेत्र आंंवा (राजस्थान) श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर (राजस्थान) सुधासागर इंटर कॉलेज ललितपुर (उत्तरप्रदेश) आ 0 ज्ञानसागर वागर्थ विमर्श केन्द्र, ्र ब्यावर (राजस्थान) अनेक गौशालाऐं आदि नवीन क्षेत्र आपकी सातिशय प्रेरणा से स्थापित होकर जैन संस्कृति का गौरव बड़ा रहे है।
  9. भारत की वसुंधरा पर शांति सुधा रस की वर्षा करने वाले श्रमण संस्कृति के तीर्थंकरों के अलावा अनेक संत और महामनीषी हुए हैं तथा वर्तमान में भी हैं, जिनकी साधना, चर्या और कथनी, करनी की एकता ने जन-जन को न केवल प्रभावित किया है वरन धर्म, अध्यात्म व अहिंसा के प्रखर प्रभावी प्रवक्ता के रूप में श्रमण संस्कृति व नमोस्तु शासन को भी गौरवान्वित किया है।
  10. भारत की वसुंधरा पर शांति सुधा रस की वर्षा करने वाले श्रमण संस्कृति के तीर्थंकरों के अलावा अनेक संत और महामनीषी हुए हैं तथा वर्तमान में भी हैं, जिनकी साधना, चर्या और कथनी, करनी की एकता ने जन-जन को न केवल प्रभावित किया है वरन धर्म, अध्यात्म व अहिंसा के प्रखर प्रभावी प्रवक्ता के रूप में श्रमण संस्कृति व नमोस्तु शासन को भी गौरवान्वित किया है।
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