श्वांस रोग वाक्य
उच्चारण: [ shevaanes roga ]
उदाहरण वाक्य
- पुराना गुड़ और सरसों का तेल 10-10 ग्राम की मात्रा में मिलाकर प्रतिदिन 1 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से 3 सप्ताह में ही सभी प्रकार के श्वांस रोग जड़ सहित नष्ट होते हैं।
- श्वांस रोग विशेषज्ञ के अनुसार सर्दियों का मौसम स्वास्थ्य के हिसाब से अच्छा माना जाता है, लेकिन कुछ खास व्याधियों जैसे अस्थमा, हृदय रोग, कैंसर से ग्रसित व्यक्तियों के लिए यह मौसम कुछ समस्याएं भी लाता है।
- क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी रामगोपाल बताते है कि जेनरेटरों के पास से निकलने व ध्वनि प्रदूषण बढ़ने से कानों को हानि पहुंचती है तो जेनरेटर से निकलने वाले धुयें से लोगों को श्वांस रोग हो सकता है।
- कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. राजू व्यास, हदय रोग विशेषज्ञ, नई दिल्ली होंगे जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. मोहम्मद साबिर सेनि श्वांस रोग विशेषज्ञ, बीकानेर करेंगे जबकि विशिष्ट अतिथि डॉ. कालीचरण माथुर अध्यक्ष वरिष्ठ नागरिक समिति बीकानेर रहेंगे।
- श्वांस रोग विशेषज्ञ के अनुसार सर्दियों का मौसम स्वास्थ्य के हिसाब से अच्छा माना जाता है, लेकिन कुछ खास व्याधियों जैसे अस्थमा, हृदय रोग, कैंसर से ग्रसित व्यक्तियों के लिए यह मौसम कुछ समस्याएँ भी लाता है।
- अडूसा, हल्दी, धनिया, गिलोय, पीपल, सोंठ तथा रिगंणी के 10-20 ग्राम काढे़ में एक ग्राम मिर्च का चूर्ण मिलाकर दिन में तीन बार पीने से सम्पूर्ण श्वांस रोग पूर्ण रूप से नष्ट हो जाते हैं।
- इसी महत्ता पर श्वांस जनित रोगों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा-परिचर्चा के लिए विश्व भर के श्वांस रोग विशेषज्ञों का पांच दिवसीय वार्षिक अधिवेशन नीदरलैण्ड की राजधानी अमस्टर्डम में 24 से 28 सितम्बर तक यूरोपीय रेस्पाइरेट्री सोसाइटी के बैनर तले होने जा रहा है।
- व्रणों में लेप के रूप में, मुँह के छालों में क्वाथ से कुल्ला करके, मस्तिष्क दुर्बलता में चूर्ण रूप में, रक्त विकार शोथ में उबालकर, श्वांस रोग में चूर्ण, जीर्ण ज्वरों में चूर्ण रूप में इसका प्रयोग होता है ।
- फिर समय के साथ श्वांस रोग भी जटिल हो गए हैं| जड़ी-बूटियाँ वही पुरानी की पुरानी है| ज्यादातर पारम्परिक चिकित्सकों ने अपने पारम्परिक मिश्रणों को मजबूती नही प्रदान की है नई जड़ी-बूटियाँ मिलाकर| इसलिए कभी-कभी तो लगता है कि जैसे शरद पूर्णिमा के दिन का आयोजन मात्र एक औपचारिकता ही रह गयी है| पर ऐसा सभी मामलो में नही है|
- शरद पूर्णिमा आने वाली है| सालों से उन पारम्परिक चिकित्सकों के अथक परिश्रम और निस्वार्थ सेवाओं को देख रहा हूँ जो हर साल बेसब्री से इस दिन की प्रतीक्षा करते हैं और फिर शरद पूर्णिमा की रात जब हजारों की संख्या में श्वांस रोग से प्रभावित आम लोग एकत्र हो जाते हैं तो रात भर जागकर बिना थके उन्हें अपने हाथों से बनाई विशेष खीर खिलाते रहते हैं| इसके लिए कोई पैसे नही लिए जाते हैं| दूध से लेकर शक्कर और सबसे महत्वपूर्ण जड़ी-बूटियों सभी का खर्च स्वयम वहन करते हैं|