सिद्धार्थ शंकर राय वाक्य
उच्चारण: [ sidedhaareth shenker raay ]
उदाहरण वाक्य
- और कहा कि इस छात्र परिषद टाइप महिला ने फिर उन्हीं गुंडों का राज कायम करने का मसौदा बना लिया है, जिन्होंने सिद्धार्थ शंकर राय के ज़माने में बंगाल को क़त्लगाह बना दिया था.
- सत्तर के दशक में श्री सिद्धार्थ शंकर राय, श्री डी. के. बरुआ, श्री चंद्रजीत यादव, श्री रजनी पटेल, डॉ कर्ण सिंह और श्री आर.के. मिश्र कांग्रेस के प्रगतिशील खेमे के मजबूत स्तंभों में से थे.
- यदि देखा जाये तो सन १ ९ ७ १-१ ९ ७ २ जब श्री सिद्धार्थ शंकर राय केंद्रीय शिक्षा मंत्री बने उनके पश्चात् सभी सिक्षा मंत्रियों ने शिक्षा जगत को नस्त्नाबुद कर दिया.
- हमने अपने कालेज के दिनों में कलकता का नक्सलाईट मूवमैंट (1969-1970 & 1971 सिद्धार्थ शंकर राय के मुख्यमंत्री बनने तक) चरम पर देखा और भुगता है जिसके दंश आज भी यादों में जिंदा हैं.
- सन 1977 मे कांग्रेस नेता और ज्योति बसु के अन्यतम बाल सखा सिद्धार्थ शंकर राय की दुर्नीतियों को बैलट के माध्यम से परास्त कर जब वामपंथी गठबंधन बंगाल की हुकूमत में आया, तो ज्योति बाबू सर्वसम्मति से वामपंथी मुख्यमंत्री बने।
- इंदिरा गांधी द्वारा लगाये गये आपातकाल और उसके बाद लोगों के बीच कांग्रेस के खिलाफ जनाक्रोश ने लगभग यह तय कर दिया था कि सिद्धार्थ शंकर राय के नेतृत्व वाली कांग्रेस बंगाल की सत्ता से रुख्सत होने जा रही है.
- परिवर्तन की इस लहर से पहले तक सिद्धार्थ शंकर राय राज्य के अंतिम गैर-कम्युनिस्ट मुख्यमंत्री थे जो 1972 में कांग्रेस के बंगाल की सत्ता में आने पर उस वर्ष 9 मार्च को मुख्यमंत्री बने और 21 जून, 1977 तक पदभार संभाला।
- इस आक्रमण को प्रभावी व सफल बनाने हेतु वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ अपने पास ओम मेहता, बंसीलाल, विद्याचरण शुक्ल, एच. आर. गोखले, सिद्धार्थ शंकर राय और देवकान्त बरूआ के समान लोगों का गिरोह भी संगठित कर लिया।
- ठीक इसी समय इंदिरा जी के बंगले पर उनके अति विश्वस्त सिद्धार्थ शंकर राय, बंशीलाल, आर. के. धवन और संजय गांधी की चौकड़ी कुछ और ही षडयंत्र रच रहे थे, जिससे 28 वर्षीय लोकतंत्र का गला घोंटा जाना था।
- इलाहबाद हाईकोर्ट में जस्टिस जगमोहनलाल सिन्हा का निर्णय जब श्री राजनरायण की याचिका पर इंदिरा जी विरुद्ध आया तो संविधान संसोधन कर लोकसभा का कार्यकाल ५ से ६ वर्ष तक करना, आपात स्थिति की घोषणा एवं मिडिया पर सेंसरशिप इत्यादि सभी सुझावों को देने वाले श्री सिद्धार्थ शंकर राय सबसे पहले इंदिरा जी की हार से बदले और उनके खिलाफ गवाही दी.