सुदर्शन फ़ाकिर वाक्य
उच्चारण: [ sudershen fakir ]
उदाहरण वाक्य
- मिर्ज़ा ग़ालिब, फ़िराक़ गोरखपुरी, कतील शिफ़ई, शाहीद कबीर, अमीर मीनाई, कफ़ील आज़ेर, सुदर्शन फ़ाकिर, निदा फ़ाज़ली, ज़का सिद्दीक़ी, नाज़िर बकरी, फ़ैज़ रतलामी और राजेश रेड्डी जैसे शायरों के ग़ज़लों को उन्होंने अपनी आवाज़ दी।
- The Latest की अपनी पसंदीदा ग़ज़लों ' चराग़ ओ आफ़ताम गुम बड़ी हसीन रात थी ', ' शायद मैं ज़िंदगी की सहर ले के आ गया ' का जिक्र मैं सुदर्शन फ़ाकिर को दी हुई श्रृद्धांजलि में मैं पहले ही कर चुका हूँ।
- कैफ़ी, आज़मी, गज़ल, बेगम, अख्तर, सुदर्शन फ़ाकिर को विनम्र श्रद्धांजलि अपनी खूबसूरत गज़लों और नज़्मों से लाखों लोगों के दिल में बसे सुदर्शन फ़ाकिर के देहांत की खबर किसी भी संगीत-प्रेमी के लिये महज़ एक साधारण खबर नहीं हो सकती.
- कैफ़ी, आज़मी, गज़ल, बेगम, अख्तर, सुदर्शन फ़ाकिर को विनम्र श्रद्धांजलि अपनी खूबसूरत गज़लों और नज़्मों से लाखों लोगों के दिल में बसे सुदर्शन फ़ाकिर के देहांत की खबर किसी भी संगीत-प्रेमी के लिये महज़ एक साधारण खबर नहीं हो सकती.
- शुरूवात हुई बेगम अख़्तर से, सुदर्शन फ़ाकिर का कलाम-ज़िन्दगी कुछ भी नहीं फिर भी जिए जाते हैतुझपे ऐ वक़्त हम एहसान किए जाते हैफिर जुगल आवाज़े रही अहमद हुसैन और मोहम्मद हुसैन की जिसके बाद मेहदी हसन, पिनाज़ मसाणी और समापन हुआ सुमन कल्याणपुर से।
- एक अदद नानी की कहानी और बारिश के पानी के लिए सारी दौलत और शोहरत को कुर्बान करने वाले “ सुदर्शन फ़ाकिर ” के बारे में जितना भी कहा जाए उतना कम है, फिर भी हमारी यह पूरी कोशिश रहेगी कि आप सबको उनकी ज़िंदगी से रूबरू कराया जाए।
- ज़िन्दगी की सहर, यानी जीवन की शुरुआत होती है वहाँ से जहाँ पर आत्मा शरीर का लिबास धारण कर लेती है, और सुदर्शन फ़ाकिर के लिए यह काम हुआ था फ़िरोज़पुर के एक छोटे से गाँव रेतपुर में जो आज भारत-पाकिस्तान के सरहद पर स्थित सेना की एक छावनी है।
- उन दिनों साथी लेखकों, कलाकारों में कुमार विकल, सुदर्शन फ़ाकिर, कृष् ण अदीब, सत् यपाल आनंद, नरेश कुमार ' शाद ', प्रेम बारबरटनी, रवींद्र रवि, जसवंत सिंह विरदी, मीशा, सुरेश सेठ, जगजीत सिंह (सुप्रसिद्ध गजल गायक), हमदम आदि लोग उल् लेखनीय हैं।
- मुझे तेरी दूरी का ग़म हो क्यों तू कहीं भी हो मेरे साथ है (निदा फ़ाज़ली) हवस-नसीब नज़र को कहीं क़रार नहीं मैं मुन्तिज़र हूं मगर तेरा इन्तज़ार नहीं (साहिर लुधियानवी) आप कहते थे के रोने से न बदलेंगे नसीब उम्र भर आपकी इस बात ने रोने न दिया (सुदर्शन फ़ाकिर) regards
- आज न सुदर्शन फ़ाकिर इस दुनिया मे हैं और न ही जगजीत सिंह, पर बचपन को याद करने का जो तरीका दोनों हमें सिखा गए हैं इस नज़्म के ज़रिए, जब तक बचपन रहेगा, जब तक जवानी रहेगी, जब तक बुढ़ापा रहेगा, हर पड़ाव के लोग इस नज़्म को दिल से महसूस करते रहेंगे, इस नज़्म को सुनते हुए अपने बचपन को बार-बार जीते रहेंगे।