स्वयंसिद्धा वाक्य
उच्चारण: [ sevyensidedhaa ]
उदाहरण वाक्य
- आधुनिक स्त्री-विमर्श जिस शक्तिस्वरूपा, स्वयंसिद्धा, मनस्विनी नारी की प्रतिमा सामने रखकर अपनी बात कह रहा है वह प्रतिमा महामुनि व्यास ने महाभारत में हजारों वर्षों पूर्व ही गढ़कर लोकमानस में प्रस्थापित कर दी थी।
- देश के प्रसिद्ध संगीत आयोजनों, तानसेन संगीत समारोह, उत्तराधिकार, स्वयंसिद्धा, हरिदास समारोह, दुर्लभ वाद्य विनोद आदि में वरिष्ठ संगीतकारों की उपस्थिति में राधिका वीणा वादन कर चुकी हैं और उनसे आशीष पाए हैं।
- समूह ने अभी तक व्यक्तिगत आय उपार्जन कार्य एवं सामूहिक गतिविधियों के लिए बैंक से पांच बार कुल नौ करोड़ 75 लाख रुपये के ऋण लिए हैं और उन्होंने स्वयंसिद्धा के तहत विभिन्न विभागों और संस्थानों से क्षमता विकास एवं कौशल सुधार प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
- रति विलाप ', ' चिर स्वयंवरा ', ' करिए छिमा ', ' उपप्रेती ', ' स्वयंसिद्धा ', ' कृष्णवेली ', ' मणि माला की हँसी ', ' पूतों वाली ', ' माणिक ' आदि रचनाओं में शिवानी की कहानियाँ प्रकाशित हैं।
- ‘ धम्मपद ' सिद्ध! तुमने जो खोजा है मरण में स्त्री ने ढूँढ़ लिया जीवन में स्त्री है नृत्य है स्त्री संगीत स्त्री रसधार है स्त्री है प्रीत बँधे वो शास्त्र में कैसे भला स्त्री होती है स्वयंसिद्धा! जिंक्सड इनाम है पैदा होने पर इनाम है शाला जाने पर
- महिला स्वयंसिद्धा योजना, महिला स्वाधार योजना, महिला उद्यमियों के लिए ऋण योजना, स्वशक्ति योजना, किशोरी शक्ति योजना, जननी सुरक्षा योजना, किशोरी पोषण योजना जैसी हाल की योजनाओं के अलावा बहुत सी पहले से चली आ रही रही महिला सशक्तिकरण योजनाओं के जरिये महिलाओं को समानता का अधिकार दिलाने में बहुत हद तक मदद मिली है।
- मीनाक्षी स्वामी को नतोहं [उपन्यास], अखिल भारतीय भवानी प्रसाद मिश्र पुरस्कार डा. मधुरिमा सिंह को स्वयंसिद्धा यशोधरा [कविता] एवं अखिल भारतीय आचार्य रामचंद्र शुक्ल पुरस्कार [आलोचना] के लिए अरुण होता को ' आधिुनिक हिंदी कवित: युगीन संदर्भ ' [आलोचना] के लिए घोषित किए गए हैं।
- मेरे लिये जरूरी नहीं है तुम्हारे सुर में सुर मिलायूं तुम्हारी हां को स्वीकारूं तुम्हारे तय किये निर्णय मानूं तुम्हारे कंधे का सहारा लूं तुम्हारी राह तकूं क्योंकि अपने अंदर की स्वयंसिद्धा मैं पहचान गई हूं तुम्हें भी जान गई हूं मौका पड़े तो भरी सभा में देख सकते हो मेरा चीर हरण इक जरा सी बात पर दे सकते हो जगलों की भटकन
- -इन पुकारों से ऋचाएँ प्रकट होंगी यह धुआँ तस्वीर आँकेगा हवन की इस घुटन की साधना में से जगेगा स्वयंसिद्धा शक्ति विजडत विश्व मन की गीतकार अपना स्वर सबके स्वर से टकराना व अपने गीतों को जमाने भर को गाने देना चाहता है, क्योंकि बंद किवाडों में उसका दम घुट जाएगा इसलिए रोशनी को सदन तक आने दो की अभिव्यक्ति करता है।
- जो औरते उठा लेती है घर-परिवार की जिम्मेदारिया वो औरतें, औरतें नहीं रह जाती वे एक मशीन बन् जाती है सतत, स्वचालित और स्वयंसिद्धा बिन ब्याही औरते सपने नहीं देखती सिर्फ आदर्शो, मूल्यों और तिलान्जलियों की बातें करती है उनके हंसने पर खिल उठती है कलियाँ गुनगुना देती है ओंस की बूंदें और सडकों पर पसर जाती है धूप जिम्मेदार औरतें जिम्मेदारी निभाती है दे देती है सब कुछ जीवन का और अंत में रह जाती है एकदम रितती हुई जीवन के बियाबान में पृथ्वी की तरह.