स्वामी सत्यानन्द वाक्य
उच्चारण: [ sevaami setyaanend ]
उदाहरण वाक्य
- गुडग़ांव-महामंडलेश्वर 1008 श्री श्री स्वामी सत्यानन्द महाराज जी ने अपनी कथा का शुभारम्भ करते हुए कहा कि भगवान सर्वज्ञ है, सर्वशक्तिमान है और सबके सुहृद है और वे सदा-सर्वदा सर्वत्र तुम्हारे साथ है, उनका रक्षक हाथ सदा तुम्हारी रक्षा के लिए तैयार है।
- जो भावनावान भावुक जन, भागवती भक्ती-भागीरथी में स्नान करने के इच्छुक हैं, जो भक्ती धर्म के मर्म को जानना चाहते हैं, और जो भक्ती योग के सच्चे, सरल, सरस, सुपथ पर चलने के अभिलाषी हैं उनको स्वामी सत्यानन्द-रचित, भक्ती-प्रकाश ग्रन्थ सुमननपूर्वक पढना चाहिए
- जो भावनावान भावुक जन, भागवती भक्ती-भागीरथी में स्नान करने के इच्छुक हैं, जो भक्ती धर्म के मर्म को जानना चाहते हैं, और जो भक्ती योग के सच्चे, सरल, सरस, सुपथ पर चलने के अभिलाषी हैं उनको स्वामी सत्यानन्द-रचित, भक्ती-प्रकाश ग्रन्थ सुमननपूर्वक पढना चाहिए विषय सूची
- बाद का जीवन-> उन्होंने विवाह किया और उनके तीन पुत्र व दो पुत्रियाँ हुईं! बाद में एक योगी के संपर्क में आने से उनकी अनासक्ति भाव में प्रवर्ति हुई! इसी समय स्वामी सत्यानन्द गिरी जी और उनके मित्र पुल्लिन जी के निवास पर जाते और वहां सत्संग, आदि किया करते थे!