हरियाणवी भाषा वाक्य
उच्चारण: [ heriyaanevi bhaasaa ]
उदाहरण वाक्य
- सभी राज्यों की अलग अलग भाषा होने के कारण भी उनको डर सता रहा था कि उनके छोटे छोटे बच्चों द्वारा हरियाणवी भाषा को वे समझ पाएंगे या फिर उनकी भाषा को ये बच्चे कैसे समझेंंगे।
- हरियाणा अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में हर बार एक सवाल जरूर उठता है...कि जब भोजपुरी जैसी क्षेत्रीय भाषा की फिल्मों का करोड़ों का बाजार हो सकता है तो हरियाणवी भाषा की फिल्मों का बाजार क्यों नहीं बनाया जा सकता है।
- यदि बुरा न माने तो इमानदारी से कहना चाहूंगा कि जहाँ तक हरियाणवी भाषा का प्रयोग किया गया है, वहाँ तक तो आपकी ये व्यंग्य रचना बहुत जबरदस्त बन पडी है, किन्तु उससे आगे तो ऎसा लग रहा था कि जैसे इसे जबरदस्ती खींचा जा रहा है।
- अपना खेत अपनी पाठशाला, कीट साक्षरता केंद्र, महिला खेत पाठशाला, चौपटा चौपाल, निडाना गांव का गौरा, कृषि चौपाल, प्रभात कीट पाठशाला सहित एक दर्जन के लगभग ब्लॉग बनाए हुए हैं और इन ब्लॉगों पर ये किसान पूरी ठेठ हरियाणवी भाषा में अपने विचार प्रकट करते हैं।
- ताऊ एक विचार धारा है, पर उनके रुप अनेक है कभी वे विचारो को यूगीन भाषा मे प्रतुति देते नजर आते है, कभी वे मग्गा बाबा के रुप मे भाष्यकार बनकर उभरते है, कभी उन मे से हरियाणवी भाषा मुखरित होती है, तो कभी वे हिन्दी भाषा के वाग्मी सन्त बन जाते है।
- ताऊ एक विचार धारा है, पर उनके रुप अनेक है कभी वे विचारो को यूगीन भाषा मे प्रतुति देते नजर आते है, कभी वे मग्गा बाबा के रुप मे भाष्यकार बनकर उभरते है, कभी उन मे से हरियाणवी भाषा मुखरित होती है, तो कभी वे हिन्दी भाषा के वाग्मी सन्त बन जाते है।
- साहित्यकार सम्मानित जगदगुरु ब्रह्मानंद ट्रस्ट के सौजन्य तथा हरियाणा साहित्य अकादमी पंचकूला व हिन्दी विभाग कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में हरियाणवी भाषा साहित्य-संस्कृति विषय पर आयोजित संगोष्ठी में साहित्य सभा कैथल के साहित्यकारों कंवल हरियाणवी, रिसाल जांगड़ा, रामफल गौड़ व डा. चतरभुज बंसल को उनके कृत्तित्व सहयोग के लिये अंग वस्त्र एवं प्रशस्तिपत्र प्रदान
- पुस्तक-प्राचीन विश्व का उदय एवं विकास (विज्ञान की भूमिका) लेखक-ओमप्रकाश प्रसाद प्रकाशक-राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली मूल्य-600 रूपए हरियाणवी फिल्म की भावी चुनौतियां उमेश चतुर्वेदी हरियाणा अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में हर बार एक सवाल जरूर उठता है...कि जब भोजपुरी जैसी क्षेत्रीय भाषा की फिल्मों का करोड़ों का बाजार हो सकता है तो हरियाणवी भाषा की फिल्मों का बाजार क्यों नहीं बनाया जा सकता है।