२० सितम्बर वाक्य
उच्चारण: [ 20 sitember ]
उदाहरण वाक्य
- अब इसे हड़बड़ी नहीं कहा जायेगा तो और क्या कहा जायेगा कि बंदे ने पहली पोस्ट लिखी २० सितम्बर, २००४ को जिसके दो साल पूरे होंगे दो हफ्ते बाद लेकिन अगले को केक काटने का बुखार सवार है।
- २० सितम्बर, १९८५ को सर्वसम्मति से स्वीकृत प्रस्ताव ५७१ (१९८५) के जरिए, दक्षिणी अफ्रीका की, उसके द्वारा अंगोला पर लगातार औरपूर्वनियोजित सशस्त्र हमला किए जाने तथा उसके द्वारा उस देश की प्रभुसतातथा क्षेत्रीय अखण्डता का खुल्लमखुल्ला उल्लंघन करने के कारण निन्दा कीगई थी.
- पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य (२० सितम्बर १९११-०२ जून १९९०) का जन्म आश्विन कृष्ण त्रयोदशी विक्रमी संवत् १९६७ (२० सितम्बर, १९११) को उत्तर प्रदेश के आगरा जनपद के आँवलखेड़ा ग्राम में (जो लतेसर मार्ग पर आगरा से पन्द्रह मील की दूरी पर स्थित है)
- ग्राम होरीपूरा, तहसील बाह, जिला आगरा उत्तर प्रदेश में २० सितम्बर १९३९ को जन्मी चित्राजी ने विधि और साहित्य के क्षेत्र में ख्यातिलब्ध पिता न्यायमूर्ति ब्रिजकिशोर चतुर्वेदी बार-एट-ला, से सनातन मूल्यों के प्रति प्रेम और साहित्यिक सृजन की विरासत पाकर उसे सतत तराशा-संवारा और अपने जीवन का पर्याय बनाया.
- 20 सितम्बर 2011 को शेखावाटी के रलावता गांव में संपन्न हुए महाराव शेखाजी की प्रतिमा के अनावरण समारोह में भगतपुरा वासियों ने भी बड़े जोश के साथ भाग लिया|ज्ञात हो २० सितम्बर को शेखावाटी व शेखावत वंश के प्रतिष्ठाता, नारी सम्मान के रक्षक और साम्प्रदायिक सदभाव के प्रतीक महाराव...
- ग्राम होरीपूरा, तहसील बाह, जिला आगरा उत्तर प्रदेश में २० सितम्बर १९३९ को जन्मी चित्राजी ने विधि और साहित्य के क्षेत्र में ख्यातिलब्ध पिता न्यायमूर्ति ब्रिजकिशोर चतुर्वेदी बार-एट-ला, से सनातन मूल्यों के प्रति प्रेम और साहित्यिक सृजन की विरासत पाकर उसे सतत तराशा-संवारा और अपने जीवन का पर्याय बनाया.
- सोमवार २० सितम्बर सन २०१० को मेरे मकान के सामने बार्डर लाइन के आगे २ फुट नाला की जमीन छोड़कर आस पास के अराजक तत्वों ने सामने ही स्तिथी एक पीपल के पेड़ के नीचे की जमीन घेर कर पहले एक चबूतरा बनाया और बाद में उस पर हनुमान जी की मूर्ती रखने का इन्तजाम [...]
- जिनको मैं इस पृथ्वी पर ईश्वर का विश्व धर्मं सभा में स्वामी जी का व्याख्यान-4 धर्म भारत की प्रधान आवश्यकता नहीं, २० सितम्बर १८९३ईसाइयों को सत् आलोचना सुनने के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए, और मुझे विश्वास हैं कि यदि मैं आप लोगों की कुछ आलोचना करूँ, तो आप बुरा न मानेंगे ।
- तथ्य्ज्ञान के अभाव में कल्पनाशक्ति से समसामयिक लेख नहीं लिखे जाते, उनमे तथ्यपरक बातों का समावेश होना भी जरुरी होता है,आप कहती हैं कि स्वामी रामदेव डर कर राजनीति छोड़ हरिद्वार लौट कर योग सिखाने लगे,जबकि और लोगों को पता है कि वो २० सितम्बर से फिर देशव्यापी आन्दोलन शुरू करने वाले हैं.वैसे आपकी यह सोच सही हो सकती है कि अन्ना हजारे के आन्दोलन को शुरू में सरकार ने शाह दी,किन्तु यह तो स्पष्ट है कि अगर ऐसा किसी प्रकार संभव था भी तो अब कमान उनके हाथों से निस्संदेह छूट चुकी है.