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दुखद मृत्यु उदाहरण वाक्य

दुखद मृत्यु अंग्रेज़ी में मतलब

उदाहरण वाक्य

  1. चालक ने विमान को धावन पथ से थोड़ा पहले उतार तो लिया किन्तु तब तक आग नें सम्पूर्ण विमान को जला कर नष्ट कर दिया था तथा उस में सवार सभी व्यक्तियों की (चालक सहित) दुखद मृत्यु हो चुकी थी।
  2. राहुल बाबा, कृपया समझने कि कोशिश करे...आपके पिता के पास ढेर सारी संपत्ति आपके परिवार के खाते (शWईश्श बैंक) में थी जब उनकी दुखद मृत्यु हुई| एक आम युवा को काम करना पड़ता है जीने के लिये और आपके परिवार को सिर्फ जीने के लिये एक अच्छा णेटWओर्ख बस बनाना होता है.
  3. ऐसे समय में, ये अतीत की याद में अपने पुरखों की दुखद मृत्यु पर रोने वाले खुद अपने ही हाथों, अपने भाइयों की लाशें गिराते हैं … दंगों में बढ़ चढ़ के हिस्सा लेते हैं और मृत लोगो पर रो रो कर जीवितों का सर काटने के लिए तिलमिलाते छटपटाते रहते हैं..
  4. भारत के लोकप्रिय प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी की ताशकंद (रूस) में दुखद मृत्यु या हत्या के बाद (हत्या इसलिए लिख रहा हूँ क्योंकि शास्त्री जी का पार्थिक शारीर, जब भारत लाया गया तो उनके शारीर पर नीले व् सफ़ेद धब्बे थे, उनकी आँखें व् नाखून नीले पड गये थे! जो अक्सर जहर के असर के कारण होता है!
  5. दिल्ली के नरक, और अपनी दुखद मृत्यु, की ओर जाने से पहले, सुरेन्द्रपाल लगभग रोज़ हरे रंग की अपनी रैले साइकिल पर, चमड़े का अक्सर प्रूफ़ों से भरा थैला हैण्डल से लटकाये, हमारे घर आते ; प्रूफ़ पढ़ते ; पाण्डुलिपियों की प्रेस-कॉपी तैयार करते, तरह-तरह की योजनाएँ बनाते, घण्टों गप्पें लड़ाते, और शहर के साहित्यिक जगत के बारे में गलचौर करते।
  6. मित्रों जब बाला साहेब ठाकरे की धर्मपत्नी और उनके पुत्र की एकमहीने के भीतर ही दुखद मृत्यु हुआ था तब तात्कालीन प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा मातोश्री बाला साहेब को सात्वना देने गए थे तब लेफ्ट, सपा, और कांग्रेस ने संसद मे बहुत हंगामा मचाया था कि एक साम्प्रदायिक नेता के घर प्रधानमंत्री सात्वना देने क्यों गए? और तो और उस समय शरद पवार कांग्रेस मे थे और जब शरद पवार गए तो कांग्रेस ने उनसे नोटिस देकर पूछा कि आप क्यों गए?
  7. पिछले बरस 18 दिसंबर 2011 को उनकी दुखद मृत्यु पर शोक तो बहुत मनाया गया लेकिन आज साल भर बीतते बीतते ही उस समाज और बौद्धिक जगत के दोहरे चरित्र की पोल खुल गई जो जीते जी अदम को सर माथे पर बिठाने का दम भरता था. और आज उसे उनकी याद तक नहीं.अदम के गांव से हरिशंकर शाही की रिपोर्ट “वेद में जिनका हवाला हाशिए पर भी नहीं, वे अभागे आस्था विश्वास लेकर क्या करें” अदम की ही लिखी यह नज़्म वर्ण व्यवस्था में त्याज्य जातियों के हालात पर लिखी थी.
  8. कल रात को टीवी पर खबरें देखते वक्त जब न्यूज एंकर ने दिल्ली के ग्रीनपार्क इलाके में एक ३३ वर्षीय डाक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता आनंद भास्कर मोरला की भरी दोपहर बाज़ार में एक नंगे बिजली के तार से करंट लगने से हुई दुखद मृत्यु का समाचार देते हुए यह कमेन्ट दिया कि देखा जाए तो आनंद भास्कर की करंट लगने से मृत्यु नहीं बल्कि उनकी हत्या हुई है, और उसका हत्यारा हमारा यह सिस्टम है, तो कुछ विचार मेरे मानसिक पटल पर उत्तराखंड त्रासदी के बारे में भी कौंधे, जिन्हें यहाँ लिपिबद्ध कर रहा हूँ।
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